रथारूढ़ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र भाई और सुभद्रा बहन के दर्शन के लिए उमड़ा जनसैलाब

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। शहर के राजा पारा स्थित महाप्रभु जगन्नाथ मंदिर में रियासत काल से ओड़िशा के जगन्नाथ पुरी की तरह भगवान महाप्रभु के जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव को ऐतिहासिक एवं यादगार ढंग से मनाने की परंपरा चली आ रही है। इस बार भी श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति और राज परिवार के सदस्यगण व श्रद्धालुगण मिलकर श्रद्धा व भव्यता से मना रहे हैं। विगत दिवस श्री जगन्नाथ मंदिर का कपाट खुला एवं नेत्र उत्सव जिसे ‘नबाजौबन’ दर्शन के नाम से भी जाता है, का आयोजन किया गया। उस दिन भगवान के नेत्र खुल जाते हैं, जिसकी खुशी में नेत्रोत्सव उत्सव श्रद्धा व धूमधाम मनाया गया। भगवान को काजल लगाकर नवयौवन श्रृंगार, महाआरती एवं छप्पप भोग का प्रसाद अर्पित किया गया। वहीं आज 16 जुलाई को जगन्नाथ महाप्रभु मंदिर से निकलकर अपने भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ रथारूढ़ होकर भक्तों को दर्शन देने निकले। पुरानी बस्ती में ऐतिहासिक रथ यात्रा निकाली गई तो समूचा अंचल पवित्र मंत्र हरि बोलो व जय जगन्नाथ के पावन मंत्र से गुंजित हो गया।
जयकारे के साथ हुई पहंडी पूजा – आज शाम पांच बजे महाप्रभु जगन्नाथ, बलभद्र एवं सुभद्रा के साथ रथ पर आरुढ़ होकर अपनी मौसी रानी गुंडिचा देवी के यहां जाने हेतु निकले। रायगढ़ के राज परिवार द्वारा भगवान के पहंडी कार्यक्रम का शुभारंभ रथ के आगे झाडू से बुहारकर (छेरा पहरा) रायगढ़ के राज परिवार के नन्हें-मुन्नों राजकुमारों द्वारा भगवान के पहंडी कार्यक्रम किया गया व ढ़ोल नगाड़े, पवित्र मंत्र हरि बोलो जयकारे के साथ रथ के आगे झाड़ से बुहारकर किया गया। इसमें राजपरिवार के सदस्य सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह व राज परिवार के साथ शहर के गणमान्य नागरिक शामिल हुए और प्रसाद ग्रहण किए। वहीं गत वर्ष की तरह राजमहल के सामने मंदिर परिसर में उत्कलिका (महिला समूह) द्वारा आनंद पाक मेला का आयोजन भी किया गया जिसका लोगों ने आनंद लिया।
मेला सा रहा माहौल – शहर में रथयात्रा महोत्सव को धूमधाम से मनाने की परंपरा रही है। वहीं आज बारिश के बावजूद भी रथोत्सव के दिन राजमहल स्थल के पास शहर के अतिरिक्त दूर दराज स्थानों से हजारों श्रद्धालुगण महाप्रभु का दर्शन पूजन करने व रथ शोभायात्रा में शामिल होकर महाप्रभु का रथ खींचने पहुँचे। वहीं राजापारा में सुबह से रात तक मेला सा माहौल रहा व पुलिस विभाग व यातायात विभाग के अधिकारी व कर्मचारीगण व्यवस्था को बेहतर बनाने में सजग रहे।
रथोत्सव की रही धूम – राजापारा भगवान जगन्नाथ मंदिर में रथोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है। इसके अतिरिक्त शहर के विभिन्न मोहल्ले में भी रथयात्रा निकाली जाती है। वहीं आज रथोत्सव के दिन सभी मंदिरों व चांदनी चौक सहित अनेक मोहल्ले में भी भगवान जगन्नाथ महाप्रभु जी की पूजा अर्चना कर प्रसाद श्रद्धालुओं ने बांटे। वहीं बच्चों में भी रथोत्सव की खुशियाँ देखते ही बनीं। उन्होंने भी श्रद्धा से पूजा – अर्चना की।
17 को गुंडिचा यात्रा – रायगढ़ की परम्परा अनुसार आज भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने नगर में निकलते हैं। इस दिन महाप्रभु का रथ राज महल प्रांगण से निकलकर गांजा चौक तक जायेगा, जहां से भगव के श्री विग्रहों को मान्यता स्वरूप गुंडिचा मंदिर में रखा जायेगा, वहां महाप्रभु 7 दिनों तक रहेंगे। वहीं 24 जुलाई शुक्रवार को शाम 4 बजे से गुंडिचा मंदिर (मौसी घर) से श्री जगन्नाथ मंदिर तक यह महाप्रभु की वापसी यात्रा है। इस दिन भगवान जगन्नाथ पुनः रथ में आरुढ़ होकर वापस अपने श्री मंदिर में आयेंगे एवं जहाँ उत्कलिका “मातृशक्ति” द्वारा महाआरती कर स्वागत किया जायेगा। धार्मिक इस कार्यक्रम के अन्तर्गत आगामी 25 जुलाई को शाम 6 बजे से
रायगढ़ के इस ऐतिहासिक मंदिर में वर्ष में सिर्फ एक बार तीनों महाप्रभु अपने बड़े भाई बलभद्र और सुभद्रा के साथ पूर्ण राजकीय भेष में अपने सभी स्वर्ण आभूषणों एवं आयुधों से अलंकृत होकर मंदिर प्रांगण में दर्शन देते हैं। इस दिन महालक्ष्मी को प्रसन्न करने हेतु रसगुल्ले का भोग लगाया जाता है। वहीं रथयात्रा उत्सव के सभी धार्मिक आयोजन को भव्यता देने में श्री जगन्नाथ मंदिर ट्रस्ट उत्कल सांस्कृतिक सेवा समिति व राजपरिवार के सदस्यगण व श्रद्धालुगण जुटे हैं।







