राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की उठाई मांग
खरसिया/रायगढ़ (सृजन न्यूज)। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर देशभर में कांग्रेस एवं अन्य विपक्षी दलों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। इसी क्रम में खरसिया कांग्रेस परिवार ने भी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता, लोकतंत्र की गरिमा और आम मतदाताओं के अधिकारों की रक्षा की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। कांग्रेसजनों ने राष्ट्रपति के नाम एसडीएम खरसिया के माध्यम से ज्ञापन सौंपकर मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग की।
कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पिछले लोकसभा एवं विभिन्न राज्यों के विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल उठे हैं। विशेष रूप से SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) तथा फॉर्म-6 के माध्यम से नए मतदाताओं के नाम जोड़ने की प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस ने आपत्ति जताई। पार्टी का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता व निष्पक्षता सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि किसी भी मतदाता के अधिकारों का हनन न हो और लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता का विश्वास बना रहे।
खरसिया मदनपुर कांग्रेस कार्यालय से तहसील कार्यालय तक आज पैदल मार्च निकला। प्रदर्शन के दौरान खरसिया के मदनपुर स्थित कांग्रेस कार्यालय से शताधिक कांग्रेस कार्यकर्ता तथा नेता हाथों में कांग्रेस के झंडे और विभिन्न नारों की तख्तियां लेकर पैदल मार्च करते हुए तहसील कार्यालय पहुंचे। पूरे रास्ते कार्यकर्ताओं ने “ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो”, “चुनाव बचाओ, देश बचाओ”, “वोट चोर गद्दी छोड़” और “लोकतंत्र से खिलवाड़ करना बंद करो” जैसे नारे लगाकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान “उमेश पटेल जिंदाबाद” और “कांग्रेस पार्टी जिंदाबाद” के नारे भी गूंजते रहे।

कांग्रेस ने उठाई निष्पक्ष चुनाव की मांग
खरसिया कांग्रेसजनों ने ज्ञापन के माध्यम से मांग की कि चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों की निष्पक्षता एवं पारदर्शिता के साथ समीक्षा की जाए तथा मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग भी उठाई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती निष्पक्ष चुनाव और जनता के मताधिकार की सुरक्षा पर निर्भर करती है। इसलिए चुनाव प्रक्रिया से जुड़े प्रत्येक सवाल का पारदर्शी समाधान होना चाहिए, जिससे लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति आम जनता का विश्वास कायम रहे।









