सलीम ने सत्ता पक्ष और प्रशासन को घेरा, सड़क हादसे में दो मौतों के बाद पूछा – आखिर किसकी है जवाबदेही ?

by SUNIL NAMDEO
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2047 का विजन नहीं, जनता को सुरक्षित सड़कें और सुरक्षित आवागमन की सुविधा चाहिए, करोड़ों के विकास खर्च के बावजूद सड़कों की हालत पर उठाए गंभीर सवाल

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। शहर की बदहाल और जानलेवा सड़कों को लेकर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने सत्ता पक्ष और प्रशासन को घेरते हुए तीखे सवाल खड़े किए हैं। रविवार को सड़क दुर्घटनाओं में हुई दो मौतों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि ये मौतें महज दुर्घटनाएं नहीं, बल्कि शहर की सड़क व्यवस्था और जिम्मेदार तंत्र पर गंभीर सवाल हैं। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यदि जनता को सुरक्षित और अच्छी सड़कें तक नहीं मिल पा रही हैं तो आखिर विकास का पैमाना क्या है।

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सलीम नियारिया ने कहा कि रायगढ़ की जनता को 2047 का विजन नहीं आज सुरक्षित और अच्छी सड़कें चाहिए। शहरवासियों को बड़े-बड़े ऑक्सीजोन और पार्क से पहले बेहतर सड़कें, सुचारू और सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि शहर में जो सड़कें बनाई गईं वे भी गुणवत्ताविहीन हैं और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गईं। नई बनी सड़कें एक बारिश भी नहीं झेल सकी और जगह-जगह गड्ढे बन कर जानलेवा साबित हो रहे हैं। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि जब किसी दुर्घटना में किसी घर का चिराग बुझ जाता है तो उस परिवार का दर्द किसी ऑक्सीजोन या बड़े पार्क से दूर नहीं होता। आखिर बेगुनाह लोगों की जान जाने के बाद जिम्मेदारी कौन लेगा और उन परिवारों के आंसू कौन पोंछेगा? जनता को विकास के नाम पर सिर्फ सपने नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देने वाला सुरक्षित और टिकाऊ विकास चाहिए।

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भ्रष्टाचार तो हो रहा है लेकिन पैसा कौन ले रहा है और जूता किसे मारें

नेता प्रतिपक्ष सलीम नियारिया ने सड़क निर्माण में कथित भ्रष्टाचार को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि नई बनी सड़कें जिस पर आज गड्ढे बन कर जलभराव हो गया है और यह जानलेवा साबित हो रहा है जो सर्व विदित है। जाहिर है यहां जमकर भ्रष्टाचार हो रहा है, तो सवाल है भ्रष्टाचार का पैसा कौन ले रहा है। इसे अधिकारी और जनप्रतिनिधि ही जाने और जूता किसे मारे यह भी वही तय करें। करोड़ों रुपये विकास के नाम पर खर्च होने के बावजूद यदि सड़कें कुछ ही समय में उखड़ जाएं और गड्ढों में तब्दील हो जाएं तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। महापौर सायकिल से अच्छी सड़कों पर तो घूम रहे हैं यदि कभी शहर की बदहाल सड़कों पर भी घूमते तो शायद उन्हें सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई देती और सड़कें ठीक हो जातीं।

दो दशक की सत्ता, फिर भी सड़क और बाईपास का संकट
सलीम नियारिया ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा को सत्ता में रहते हुए लगभग दो दशक बीतने को हैं। किसी भी राज्य के विकास के लिए इतना समय काफी होता है, लेकिन रायगढ़ आज भी बुनियादी सड़क सुविधाओं के लिए जूझ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतने वर्षों में शहर की यातायात व्यवस्था को बेहतर करने के लिए रिंग रोड और बाईपास तक नहीं बन पाए जो जानता का हक था आज भी जनता को केवल वित्तमंत्री के द्वारा लोकलुभावन सपने दिखाए जा रहे हैं। अपने भाषणों में रायगढ़ में फोर लेन सड़कों का जाल बिछाने नया रिंग रोड बनाने, ऑक्सीजोन और नए पार्क विकसित करने की बात करते रहे हैं। रिंग रोड को लेकर हाल ही में लगभग 41 करोड़ रुपए स्वीकृत किया गया है। लेकिन, इसका फायदा क्या पूछता है रायगढ़, वर्तमान में शासन के पास इतनी भी राशि नहीं है कि सड़कों के गड्ढों को बारिश में चलने लायक बनाया जा सके जिससे इंसानी जीवन की बचाया जा सके। छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री प्रशासनिक अधिकारी भी रह चुके हैं उनके पास दूरदर्शी सोच होनी चाहिए थी कि रायगढ़ जिला औद्योगिक नगरी है इस विचार से निर्णय लेने की आवश्यकता थी कि शहर में ऑक्सी जोन प्रगति नगर रोड जोगीडीपा कैनाल लिंक रोड इसके अतिरिक्त अन्य सौंदर्यीकरण के कार्य से पहले इस शहर की मूल आवश्यकता रिंग रोड और फोर लेन सड़कों को प्राथमिकता से करवाते तो शायद आज कई परिवार के सदस्यों को अपनी जान नहीं गंवानी पड़ती। विकास के नाम पर केवल योजनाओं और भविष्य के विजन की बातें करना ही नहीं विकास का पैमाना जमीन पर दिखाई देना चाहिए और उसका पहला पैमाना जनता की जिंदगी और उसकी सुरक्षा होना चाहिए।

दो मौतें दुर्घटना नहीं, व्यवस्था से सवाल हैं
श्री नियारिया ने रविवार को हुई दो मौतों को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि इन घटनाओं ने रायगढ़ की सड़क व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है। वित्त मंत्री और महापौर से सीधा सवाल की जब विकास के इतने बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं तो रायगढ़ की आम जनता को आज सुरक्षित सड़क क्यों नहीं मिल रही है ? दुर्घटनाओं की निष्पक्ष जांच में सड़क की वास्तविक स्थिति, गड्ढे, कीचड़, जलभराव, अधूरे निर्माण, बदहाल प्रकाश व्यवस्था और सड़क निर्माण की गुणवत्ता सहित सभी पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। जिस सड़क का निर्माण हुआ और वह एक बारिश भी नहीं झेल पाई, उसकी गुणवत्ता की भी जांच होनी चाहिए। जनता को 2047 के सपनों से पहले आज सुरक्षित सड़क चाहिए, आज बेहतर पानी निकासी चाहिए और आज ऐसा विकास चाहिए जो बारिश और समय की कसौटी पर टिक सके। विकास की असली तस्वीर विज्ञापनों और दावों में नहीं, बल्कि आम आदमी की सुरक्षित जिंदगी और जमीन पर दिखाई देने वाले मजबूत निर्माण में नजर आनी चाहिए।

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