पंडवानी के स्वर में तीजन बाई हो गई अमर : ओपी चौधरी

by SUNIL NAMDEO
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रायगढ़ (सृजन न्यूज)। छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति की अमर गाथाकार, पद्मश्री, पद्मभूषण और पद्मविभूषण से विभूषित, अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त पंडवानी गायिका तीजन बाई के ब्रह्मलीन होने का समाचार अत्यंत पीड़ादायक है। प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी ने उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए कहा कि मृत्यु केवल देह की होती है, तीजन बाई जैसी विभूतियां कभी नहीं मरतीं। वे अब पंडवानी के हर स्वर में अमर हो गई हैं।

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          अपने शोक संदेश में वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा पद्म विभूषण तीजन बाई का जाना भारतीय लोक कला जगत के लिए अपूरणीय क्षति है, परन्तु वे मरी नहीं हैं – वे ‘अमर’ हुई हैं। अपनी विलक्षण प्रतिभा से उन्होंने पंडवानी गायन और छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति को पूरी दुनिया में अमर पहचान दी है। जब तक महाभारत गाई जाएगी, तीजन बाई सुनी जाएंगी। तीजन बाई ने देश-विदेश में अपनी अनोखी ‘कापालिक शैली’ से पंडवानी को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई। गनियारी गांव की माटी से निकलकर लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल तक पहुंचने वाली उनकी यात्रा संघर्ष से शिखर तक की अमर गाथा है। उन्होंने पंडवानी को पुरुष प्रधान कला से निकालकर महिलाओं के लिए भी स्वर का मार्ग प्रशस्त किया।

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                                        वित्तमंत्री ने आगे कहा कि तीजन बाई काया छोड़कर गई हैं, पर उनकी पंडवानी अमर है, अनंत है। वे छत्तीसगढ़ की माटी की ऐसी बेटी थीं जिसने अपनी कला से इस माटी को विश्वपटल पर अमर कर दिया। उनका योगदान, उनका स्वर, उनकी साधना – सब अविस्मरणीय है, अक्षय है। तीजन बाई का ब्रह्मलीन होना एक युग का अंत नहीं, एक अमर युग का आरंभ है। उनके बिना पंडवानी का मंच सूना है, पर उनकी गूंज से छत्तीसगढ़ का आकाश सदा गुंजयमान रहेगा। ईश्वर से प्रार्थना है कि दिवंगत पुण्यात्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों, शिष्यों एवं असंख्य प्रशंसकों को इस कठिन समय में संबल प्रदान करें। उनके परिजनों के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं। श्री चौधरी ने विश्वास दिलाते हुए कहा सरकार तीजन बाई की अमर स्मृति को चिरस्थायी बनाने और पंडवानी की अमर परंपरा को संरक्षित करने के लिए कृतसंकल्पित है।कलाकार मरते नहीं, अमर गाथा बन जाते हैं।

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