बारिश में बच्चों की सेहत पर 5 बीमारियों का खतरा, थोड़ी सावधानी से बचाव संभव

by SUNIL NAMDEO
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बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल श्रीवास्तव ने बताए बीमारी के संकेत और बचाव के तरीके

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। बारिश बच्चों के लिए भले ही राहत लेकर आती है, वहीं इस दौरान संक्रमण का जोखिम भी बढ़ जाता है। जगह – जगह पानी का जमाव, मच्छरों की संख्या में वृद्धि, दूषित पानी-भोजन और वातावरण में नमी वायरल बुखार, दस्त-उल्टी, मलेरिया, पीलिया और डेंगू जैसी बीमारियों की वजह बन सकती है। आंख, त्वचा और नाखूनों से जुड़े संक्रमण भी इस दौरान देखने को मिलते हैं।

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        शहर के एमडी पीडियाट्रिक्स एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशुल श्रीवास्तव बताते हैं कि बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए साफ-सफाई के साथ शुरुआती संकेतों पर नजर रखना महत्वपूर्ण है। समय रहते कदम उठाने से संक्रमण को गंभीर स्थिति तक पहुंचने से रोका जा सकता है। दस्त और उल्टी होने पर शरीर से पानी और जरूरी लवण तेजी से कम होते हैं। छोटे बच्चों में इससे डिहाइड्रेशन की स्थिति बन सकती है। ऐसे में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में बार-बार ओआरएस और तरल पदार्थ दें। माड़, नींबू-शक्कर का पानी और पतली खिचड़ी भी दी जा सकती है। पेशाब कम होना, असामान्य सुस्ती या लगातार उल्टी-दस्त बने रहना चिंताजनक संकेत हैं। वायरल संक्रमण में अचानक तेज बुखार के साथ सिरदर्द, कमजोरी, भूख कम लगना, सर्दी-खांसी, आंखों में दर्द और ठंड लग सकती है। कुछ बच्चों में तापमान 102 से 103 डिग्री फारेनहाइट तक पहुंच जाता है। उन्हें पर्याप्त तरल दें और तापमान पर निगरानी रखें। हालत बिगड़ने पर चिकित्सकीय परामर्श लें और बिना सलाह दवा देने से बचें।

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ठंड और कंपकंपी के साथ बुखार हो तो मलेरिया की जांच जरूरी
मच्छरों की सक्रियता बढ़ने से मलेरिया के मामले भी सामने आ सकते हैं। बुखार के साथ ठंड, कंपकंपी, सिरदर्द, कमजोरी और बदन दर्द इसके संकेत हैं। तेज बुखार को सामान्य मौसमी बीमारी समझकर छोड़ने के बजाय जांच कराना बेहतर है। मच्छरदानी का प्रयोग करें और आसपास पानी ठहरने न दें। दूषित पानी और भोजन से पीलिया का संक्रमण हो सकता है। हल्का बुखार, जी मिचलाना, उल्टी, पेट दर्द और भूख कम होना शुरुआती संकेत हैं, जबकि आंखों में पीलापन दिखाई देना प्रमुख पहचान है। बच्चों को सुरक्षित पेयजल दें और खुले में रखा या संदिग्ध भोजन देने से परहेज करें।

जागरूकता ही है बचाव

डेंगू फैलाने वाला मच्छर साफ पानी में भी अंडे दे सकता है। इसलिए कूलर, पानी की टंकी, टब, टैंकर और अन्य पात्रों में पानी जमा न रहने दें। तेज बुखार, उल्टी, पेट दर्द, सिर व शरीर में दर्द, ठंड लगना और भूख कम होना इसके सामान्य संकेत हैं। रक्त जांच से इसकी पुष्टि होती है।
शरीर पर लाल चकत्ते, नाक या मुंह से रक्तस्राव जैसे संकेत गंभीर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति में बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए।
आंखों में संक्रमण के मामलों में लालिमा, जलन, खुजली, पानी आना और पलकों का चिपकना देखा जा सकता है। कंजंक्टिवाइटिस संपर्क से फैलता है, इसलिए हाथों की सफाई रखें और बच्चों को आंखें छूने या रगड़ने से रोकें। हवा में नमी बढ़ने से त्वचा पर फंगल संक्रमण, खुजली, लालिमा और दाने हो सकते हैं। नाखूनों में भी फंगल संक्रमण की आशंका रहती है। बच्चों को गीले कपड़ों में अधिक समय तक न रहने दें और शरीर तथा नाखूनों को साफ-सूखा रखें।

इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

डॉ. अंशुल श्रीवास्तव बताते हैं, तेज या लगातार बुखार, बार-बार उल्टी-दस्त, पेशाब कम होना, अत्यधिक सुस्ती, शरीर पर लाल चकत्ते, नाक-मुंह से खून आना, आंखों में गंभीर संक्रमण या शरीर में असामान्य सूजन जैसे लक्षण दिखाई दें तो तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए।
बारिश में बच्चों को स्वस्थ रखने के लिए साफ पानी, सुरक्षित भोजन, व्यक्तिगत स्वच्छता, मच्छरों से बचाव और घर के आसपास साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देना जरूरी है। बीमारी के लक्षणों को समय पर पहचानना और जरूरत पड़ने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना ही गंभीर संक्रमण से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।

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