इतिहास बताता है कि विभाजन ने केवल भू-भाग का नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को भी दी गहरी पीड़ा : ओपी चौधरी

by SUNIL NAMDEO
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भारत विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस पर रायगढ़ के सिंदूर पार्क में काली पट्टी बांधकर हुआ विरोध, कैंडल मार्च भी निकला

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। भारत विभाजन विभीषिका स्मरण दिवस के अवसर पर रायगढ़ के सिंदूर पार्क में भारत विभाजन की त्रासदी को स्मरण करते हुए कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान विभाजन की पीड़ा और उससे जुड़ी मानवीय त्रासदी को दर्शाती छायाचित्र प्रदर्शनी लगाई गई। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री ओपीचौधरी सहित कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी, जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे, निगम आयुक्त बृजेश सिंह क्षत्रिय सहित जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। कार्यक्रम में लोगों ने काली पट्टी बांधकर भारत विभाजन की विभीषिका के प्रति अपना विरोध प्रकट किया। इसके बाद वित्त मंत्री चौधरी की अगुवाई में कैंडल मार्च निकाला गया।
                  वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने कहा कि भारत के विभाजन की पीड़ा को समझने के लिए हमें इतिहास के उस दौर को स्मरण करना होगा, जब भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का विस्तार आज के पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान तक था। उन्होंने कहा कि सिंधु घाटी सभ्यता के हड़प्पा और मोहनजोदड़ो जैसे महत्वपूर्ण स्थल आज पाकिस्तान में हैं। इसी तरह तक्षशिला भी आज पाकिस्तान में स्थित है। उन्होंने कहा कि रवीन्द्रनाथ टैगोर, जिन्होंने राष्ट्रगान की रचना की, उनका पैतृक गांव आज के बांग्लादेश में है। यह इतिहास हमें बताता है कि विभाजन ने केवल भू-भाग का नहीं, बल्कि समाज और संस्कृति को भी गहरी पीड़ा दी।

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         वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि जब कोई देश कमजोर होता है तो उसका दुष्परिणाम पूरे समाज को भुगतना पड़ता है। इसलिए देश की मजबूती और एकता सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि भारत को मजबूत बनाने के लिए प्रत्येक नागरिक में राष्ट्र के प्रति समर्पण और जिम्मेदारी की भावना होना जरूरी है। उन्होंने विभाजन की परिस्थितियों को स्मरण करते हुए कहा कि हमें इतिहास से सीख लेकर ऐसी परिस्थितियों से बचने तथा राष्ट्र की एकता और अखंडता को मजबूत करने के लिए संकल्पित होना चाहिए। वित्तमंत्री ने कहा कि भारत की संस्कृति और विरासत व्यापक रही है और इसे समझने के लिए इतिहास के पन्नों को गंभीरता से पढ़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि विभाजन की विभीषिका को याद करने का उद्देश्य किसी के प्रति वैमनस्य पैदा करना नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इतिहास की पीड़ा से अवगत कराना और राष्ट्रीय एकता, अखंडता तथा सामाजिक सौहार्द को मजबूत करना है।
      कार्यक्रम के दौरान सिंदूर पार्क में आयोजित छायाचित्र प्रदर्शनी में भारत विभाजन के समय की परिस्थितियों, विस्थापन, संघर्ष और आम नागरिकों की पीड़ा को प्रदर्शित किया गया। नागरिकों ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर विभाजन से जुड़े ऐतिहासिक प्रसंगों की जानकारी प्राप्त की। इसके पश्चात निकाले गए कैंडल मार्च में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की स्मृति में दीप प्रज्ज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की।

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