विष्णुदेव साय की पहल से महिलाओं को मिला रोजगार, रेडी-टू-ईट निर्माण से सरस्वती समूह कमा रहा 50 हजार रुपये महीना

by SUNIL NAMDEO
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बिहान योजना से जुड़ीं डूमरमुड़ा की 10 महिलाएं बनीं आत्मनिर्भर, आंगनबाड़ी के बच्चों और महिलाओं तक पहुंचा रहीं पोषण आहार

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार महिला सशक्तिकरण और कुपोषण मुक्ति की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। इसी कड़ी में महिला स्व-सहायता समूहों को पूरक पोषण आहार रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य सौंपा गया है। इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को रोजगार और आय का अवसर मिल रहा है। रायगढ़ जिले के डूमरमुड़ा स्थित सरस्वती स्व-सहायता समूह की 10 महिलाएं रेडी-टू-ईट निर्माण से जुड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन रही हैं। समूह को इस कार्य से हर महीने करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है।

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सरस्वती स्व-सहायता समूह की सदस्य चम्पा चौहान बताती हैं कि बिहान से जुड़ने के बाद आजीविका के अवसर मिले और अप्रैल 2026 से समूह को रेडी-टू-ईट निर्माण का कार्य भी मिल गया। इससे नियमित रूप से काम करने और अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने का अवसर मिला है। वे बताती है कि हम सभी समूह की महिलाएं निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार रेडी-टू-ईट का निर्माण करते है। सबसे पहले गेहूं, चना, सोयाबीन और अन्य सामग्री की मशीनों से सफाई की जाती है। इसके बाद भुनाई, पिसाई और छनाई की प्रक्रिया पूरी कर सामग्री को मिक्सिंग मशीन में मिलाया जाता है। निर्धारित समय तक मिश्रण तैयार होने के बाद उसकी पैकिंग की जाती है। आंगनबाड़ी केंद्रों से प्राप्त मांगपत्र के अनुसार समूह द्वारा तैयार पोषण आहार का वितरण किया जाता है।

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चम्पा चौहान ने बताया कि रेडी-टू-ईट निर्माण और वितरण के काम से समूह को हर महीने करीब 50 हजार रुपये तक का मुनाफा हो रहा है। अब वे अपनी जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय स्वयं आय अर्जित कर रही हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में योगदान दे रही हैं। गौरतलब है कि जिले में कुल 2,709 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों के लिए 10 महिला स्व-सहायता समूहों का चयन किया गया है। समूहों को प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (पीएमएफएमई) के अंतर्गत पूंजीगत सब्सिडी भी प्रदान की जा रही है। राज्य शासन की इस पहल से एक ओर महिला समूहों को आजीविका का अवसर मिल रहा है, वहीं दूसरी ओर आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों और महिलाओं को पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।

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