उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल के खिलाफ भड़का जनाक्रोश, चिराईपानी में तनाव के हालात
रायगढ़ (सृजन न्यूज)। ओम श्री रूपेश कंपनी की कारस्तानी इन दिनों सुर्खियों में है। दरअसल, उद्योगपति शंकर लाल अग्रवाल के इशारे पर चिराईपानी मुख्य मार्ग को जेसीबी से इस कदर गड्ढा कर दिया गया है कि वहां आवागमन करने वाले लोग हादसे का शिकार होकर अस्पताल तक पहुंचने लगे हैं। यही वजह है कि ओम श्री रूपेश के मालिक शंकर लाल अग्रवाल की दादागिरी के शिकार ग्रामीण अब सड़क के उद्धार के लिए चक्काजाम आंदोलन का मूड बना रहे हैं।
आग उगलती गर्मी के बीच छत्तीसगढ़ प्रदेश में “सुशासन तिहार” का मौसम चल रहा है। आम जनता के समस्याओं को दूर करने के लिए सरकार गाँव-गाँव जाकर शिविर लगा रही है। जनता की हर छोटी-बड़ी शिकायतों को मौके पर ही हल कर रही है, लेकिन विडंबना ऐसी है कि जिला मुख्यालय से महज 10 किलोमीटर दूर एक ऐसा गाँव है, जहाँ के बाशिंदे एक उद्योगपति की दबंगई से बेहद परेशान और आक्रोश में है। इनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। बता दें कि रायगढ़-घरघोड़ा मुख्यमार्ग में स्थित ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित ग्राम चिराईपानी में कुछ ठीक नहीं चल रहा है। यहाँ स्थापित ओम श्री रुपेश कंपनी के मालिक शंकर अग्रवाल के नकारात्मक व्यवहार से यहाँ के निवासी काफी चिंतित, हलाकान और नाराज हैं।
ग्रामीणों के अनुसार आने-जाने का एक मात्र मुख्य सड़क जिसमें गेरवानी, शिवपुरी, पाली, देलारी, सराईपाली, जिवरी, ठरकपुर, डारआमा, बरपाली, गदगांव, राबो, गुड़गुड़, आमापाली, तेन्दुमुड़ी, बरभौना, एडू, नावापारा (टेंडा) आदि दर्जनों गांवों के ग्रामीणों का आवागमन होता है। इतना ही नहीं इस सड़क से लगे कई उद्योग स्थापित हैं, जहाँ भारी वाहन भी आते-जाते हैं। इसी व्यस्ततम मार्ग में स्थापित ओम श्री रुपेश के शंकर अग्रवाल ने अपने प्लांट के सामने ही सड़क के दोनों ओर जेसीबी से गहरा गड्ढा खोद कर सड़क को संकरा कर दिया है, जिससे ग्रामीणों और अन्य वाहन चालकों को आने-जाने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यही नहीं, सड़क के दाएं-बाएं गहरे गड्ढे हो जाने से दुर्घटना का भय हमेशा बना रहता है।
सृजन न्यूज को सेवानिवृत्त शिक्षक विपिन डनसेना ने बताया कि इस संबंध में पूँजीपथरा थाने में शिकायत भी की गई है, लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस प्रकार शंकर लाल अग्रवाल की दबंगई और प्रशासन की उदासीन रवैये से जन आक्रोश धीरे-धीरे बढ़ता ही जा रहा है। यदि जल्द ही कोई सुनवाई नहीं हुई तो ग्रामवासियों का गुस्सा कभी भी चक्काजाम का विस्फोटक रूप ले सकता है। ऐसे में किसी बड़े जन आंदोलन से इंकार भी नहीं किया जा सकता।







