सुनील इस्पात मचा रहा धूमकेतु की तरह तबाही, कभी उगलता है जहर का धुआं तो कभी फ्लाई ऐश से खेल रहा होली

by SUNIL NAMDEO
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सृजन न्यूज में खबर लगाने के बाद कंपनी ने सुध ली कमजोर दीवारों की

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। सुनील इस्पात एंड पावर लिमिटेड की चिमनियों से निकलने वाला खतरनाक धुआं पर्यावरण मानकों की धज्जियां उड़ाने के लिए काफी है। सृजन न्यूज जब चिराईपानी पहुंची तो सुनील इस्पात कंपनी की असलियत ही अलग निकली। यह कंपनी कभी जहर का धुआं उगलता है तो कभी फ्लाईएश से होली खेलता नजर आता है। यही वजह है सुनील इस्पात के खिलाफ ग्रामीण अब लामबंद होने लगे हैं।

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रायगढ़ जिले का पूँजीपथरा क्षेत्र जो कभी शुद्ध वातावरण के लिए जाना जाता था, अब खांटी प्रदूषण के लिए जाना जाने लगा है। उद्योगों की भरमार और उनके द्वारा छोड़े जा रहे खतरनाक रसायन युक्त जहरीले धुएं और राख ने यहाँ के पर्यावरण को तार-तार कर दिया है। पर्यावरण विभाग की उदासीनता से पर्यावरणखोर उद्योगों के हौसले बुलंदी पर हैं। यही वजह है कि कंपनियों द्वारा नीति-नियमों की खुलेआम धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं। नीले आकाश में जहाँ धुएं से कालिख पोत रहे हैं वहीं, हरी-भरी धरती को फ्लाई ऐश पाट कर बंजर बना रहे हैं।

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                 विदित हो कि पूँजीपथरा के अंतर्गत गेरवानी क्षेत्र में अनेकों छोटे-बड़े उद्योग संचालित हैं, जिनमें सबसे ज्यादा प्रदूषण चिराईपानी स्थित सुनील इस्पात एन्ड पॉवर लिमिटेड परोस रहा है। दिखावे के लिए दो-दो प्रदूषण मापक यन्त्र लगा रखा है और ईएसपी बंद रख खुलेआम प्रदूषण फैला रहा है। ऐसा लगता है जैसे प्रदूषण फैलाने का इसे लाइसेंस प्राप्त है। स्थानीय जनता की मानें तो ग्राम लाखा सबसे ज्यादा प्रभावित है। ग्राम के पश्चिम में स्थापित सुनील इस्पात चंद कदमों की दूरी पर है। यहाँ जब भी हवाएं चलती हैं तो पश्चिम से पूर्व की ओर ही चलती हैं, ऐसे में कंपनी का सारा डस्ट गाँव की ओर ही आता है और ये काले डस्ट छत पर ही नहीं बल्कि, घर के अंदर तक बैठ जाते हैं। कपड़े, बिस्तर के अलावा घर का सारा सामान खराब हो जाता है।

              पीड़ित बताते हैं कि रोज-रोज के डस्ट को देख अब तो मेहमान और रिश्ते-नातेदारों ने भी आना छोड़ दिया है। रिश्तों के लिए सगा संबंधी भी आते हैं तो यहाँ की दुर्गति देख कोई अपनी लड़की देना नहीं चाहते। प्रदूषण को लेकर सुनील इस्पात के अधिकारियों को शिकायत करने के बाद भी कोई ध्यान नहीं देते। इस प्रकार तमाम परेशानियों से जूझ रहे ग्रामवासियों के मन में आक्रोश की चिंगारी सुलग रही है। सवाल उठता है कि पूरे सिस्टम को जेब में रखने वाले प्रदूषणकारी आखिर कबतक पर्यावरण का चीरहरण करते रहेंगे? साँस तो वो भी इसी प्रकृति से लेते हैं तो फिर धन कमाने की होड़ में अपनी और आने वाली पीढ़ी के साँसों की परवाह क्यों नहीं?

देखिए सुनील इस्पात की सच्चाई

रंग लाई सृजन न्यूज की खबर, श्रेय ले रहे जनप्रतिनिधि

“सुनील इस्पात में भी हादसा, जर्जर दीवारें कभी भी ध्वस्त होकर बनेगी जानलेवा” शीर्षक से समाचार प्रकाशन के बाद कंपनी प्रबंधन जब हरकत में आकर सकारात्मक कार्रवाई शुरू की तो श्रेय लेने वालों की होड़ सी मच गई। कभी कोई स्थानीय जनप्रतिनिधि इसे अपनी उपलब्धि बताकर सुनील इस्पात की खतरनाक दीवारों की दुरुस्ती में सक्रिय होने के दावे करने लगे तो वहीं, कंपनी प्रबंधन अपनी लापरवाही छिपाने के लिए आनन-फानन में सुधार कार्य होने का दावा कर रही, जबकि सच यह है कि सृजन न्यूज ने इस खबर को प्रमुखता से प्रकाशित कर सुनील इस्पात और प्रशासन को आगाह कर अपना पत्रकारिता धर्म निभाया।

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