सुनील इस्पात में भी होगा हादसा! जर्जर दीवारें कभी भी ध्वस्त होकर बनेगी जानलेवा

by SUNIL NAMDEO
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ओम श्री रुपेश कंपनी में हुए हादसे के बाद भी सुनील इस्पात प्रबंधन हुआ लापरवाह

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले के उद्योगों में आये दिन विचित्र-विचित्र दुर्घटनायें हो रही हैं, जिसमें मजदूर कीड़े-मकोड़ों की तरह मारे जा रहे हैं। लोग चीखते हैं, चिल्लाते हैं, दसियों बार आवेदन-निवेदन करते हैं, धरना प्रदर्शन, चक्काजाम जैसा आंदोलन करते हैं तब कहीं जाकर सिस्टम की आँख खुलती है और दोषियों पर कार्रवाई होती है। शायद यही कारण है कि अपवाद स्वरुप दो चार को छोड़ सारी कम्पनियाँ लापरवाह हो गयी हैं। बता दें कि अभी हाल ही में ओम श्री रुपेश कंपनी में बाउंड्री वाल धँसने से एक नौ माह की गर्भवती महिला मजदूर को उसके पेट में पल रहे शिशु समेत जान गँवानी पड़ी थी। यही नहीं, दो और मजदूर जिसमें एक महिला भी है, अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच संघर्षरत हैं। इस दर्दनाक घटना में तहतक जाकर देखें तो इसमें कंपनी प्रबंधन की घोर लापरवाही सामने आयी है। बाउंड्री वाल के किनारे नाली नहीं खोदी गयी होती तो यह हादसा ही नहीं होता।

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                        विदित हो कि यही लापरवाही अब सुनील इस्पात एन्ड पॉवर लिमिटेड कर रहा है। इस प्लांट के पीछे भी इसका बाउंड्री वाल जो लगभग 20/25 फीट ऊँचा है, क्षतिग्रस्त हो चुका है। कॉलम टूटकर टेढ़े हो गए हैं फिर भी कंपनी के जिम्मेदार अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं। उल्लेखनीय है कि यह क्षतिग्रस्त दीवार ठीक तिराहे पर है जहाँ चौबीसों घंटे आवागमन होता रहता है। आसपास गाड़ियाँ भी खड़ी रहती हैं। इसके बगल में ही महालक्ष्मी कास्टिंग कंपनी का मेनगेट लगा हुआ है, जहाँ हमेशा लोगों का आना-जाना लगा रहता है। बरसात का मौसम शुरू चुका है, ऐसे में कहीं लगातर भारी बारिश हुई तो यह दीवार कभी भी गिर सकती है और जानमाल की हानि हो सकती है।

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                         संभावित खतरे को देखते हुए जब सृजन न्यूज ने सुनील इस्पात के डायरेक्टर प्रमोद कुमार तोला से मोबाईल फोन पर संपर्क कर उन्हें आगाह किया तो उन्होंने बताया कि हमने तो उसे बहुत पहले ही मरम्मत करवा दिया है। जबकि तस्वीरें उनके इस दावे की पोल खोल रही हैं। तस्वीरों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि दीवार की कोई मरम्मत नहीं हुई है। ईंटों को हटा दिया गया है और टूटे हुए तिरछे कॉलम जस के तस खड़े हैं। यह भी बताना आवश्यक है कि ठीक वहीं से सीएसईबी की हाई टेंशन की तारें भी गुजरी हैं। अब अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर कहीं क्षतिग्रस्त कॉलम गिरा तो कितनी तबाही मचाएगी?

जनसुनवाई संपन्न होते ही कंपनी के बढ़ गए हैं तेवर
ग्रामीणों का कहना है कि गाँव का विकास होगा, बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, गरीबों के रहन-सहन का स्तर ऊँचा होगा सोच कर हमने जनसुनवाई में इसका समर्थन किया, लेकिन इसने गाँव के हित के लिए कुछ भी नहीं किया। उल्टे हमारा जीना मुश्किल कर दिया है। सड़क बर्बाद कर दिया, रोजाना रात में ईएसपी बंद कर जहरीला डस्ट छोड़ता है, जिससे घर के अंदर तो क्या आलमारी में अंदर रखे कपड़े तक काले हो जाते हैं। साँस लेना मुश्किल हो जाता है।

कंपनी के ध्वनि प्रदूषण से परेशान सो नहीं पाते बच्चे
ग्रामवासियों की मानें तो सुनील इस्पात के पॉवर प्लांट से आये दिन स्टीम छोड़ा जाता है जिससे हवाई जहाज के शोर से भी ज्यादा तेज आवाज होता है, तेज शोर के कारण लोग आपस में बातचीत नहीं कर पाते। यही नहीं, सो रहे छोटे बच्चे रात में तेज आवाज सुनकर चौंक उठते हैं और रात भर नहीं सो पाते।

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