अग्रोहा स्टील के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा, कभी भी हो या सकता है उग्र आंदोलन

by SUNIL NAMDEO
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चिराईपानी गांव की करीब 1 एकड़ जमीन पर कब्जा कर बना अघोषित पार्किंग स्थल है विवाद की जड़, ग्राम पंचायत लाखा के जनप्रतिनिधियों की नीयत पर उठे सवाल

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। कला और संस्कार धानी नगरी से औद्योगिक तीर्थ का रूप ले रहे रायगढ़ में कुछ उद्योगपति ऐसे भी हैं, जिन्होंने अंधेरगर्दी मचा रखी है। ओम श्री रूपेश कंपनी के मालिक शंकर लाल अग्रवाल की कारस्तानी के चलते उनके ही प्लांट के लेबर क्वाटर में दीवार ढहने से गर्भवती मजदूर की मौत की जांच चल ही रही है। वहीं, अब अग्रोहा स्टील एन्ड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड के रवैय्ये से ग्रामीण खार खाए बैठे हैं। दरअसल, अग्रोहा धाम प्लांट प्रबंधन ने ग्राम पंचायत लाखा से सांठगांठ कर भाड़े पर जमीन ली कि ग्रामीणों को इसकी भनक तक नहीं लगी। हालांकि, ग्रामीणों की आपत्ति पर पंचायत को मजबूरी में एग्रीमेंट निरस्त जरूर करना पड़ा। बावजूद इसके कंपनी प्रबंधन ने एक माह गुजरने के बाद भी कब्जा नहीं हटाया। यही नहीं, अब अग्रोहा धाम के कारिंदों द्वारा गांव के सार्वजनिक रास्ते का घेराव कर उसे भारी वाहनों का अघोषित पार्किंग बना देने से क्षेत्रीय लोग ऐसे भड़के हैं कि उन्होंने उग्र आंदोलन की चेतावनी तक दे डाली हैं।

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                               दरअसल, रायगढ़ अंचल में स्थापित उद्योग प्रबंधनों की मनमानी चरम पर है। कारण यह है कि इन धन-कुबेरों के आगे पूरा सिस्टम लकवाग्रस्त हो गया है। न तो प्रदूषण थम रहा है और ना ही शोषण। ऐसे में उद्योग प्रबंधनों के हौसले बढ़ते ही जा रहे हैं। यहाँ तक कि अब ये स्थानीय गाँवों की जमीनें हड़पने से भी बाज नहीं आ रहे हैं। ऐसा ही कुछ दुस्साहस पाली स्थित अग्रोहा स्टील एन्ड पॉवर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा करने की तस्वीर सामने आ रही है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों में जेहन में अब आक्रोश की चिंगारी सुलगने लगी है जो कभी भी विस्फोटक रूप ले सकता है। ग्राम पंचायत लाखा के आश्रित गाँव चिराईपानी की लगभग एक एकड़ जमीन को अपने पार्किंग के लिए अग्रोहा कंपनी अनाधिकृत रूप से फेंसिंग तार द्वारा स्थायी घेराव व पौधरोपण कर मनमानी पर तुला हुआ है। गाँव की इस जमीन पर रोजाना दर्जनों भारी वाहनों की पार्किंग हो रही है।

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पंचायत और अग्रोहा धाम पर गंभीर आरोप
                चिराईपानी के ग्रामीणों का आरोप है कि 6 माह पूर्व ग्राम वासियों की बगैर जानकारी के गुपचुप तरीके से अग्रोहा कंपनी ने लाखा पंचायत से सांठगांठ कर उक्त जमीन को कथित रूप से किराये में लेकर पार्किंग के लिए फेंसिंग तार घेर कर कब्जा कर लिया है। हालाँकि, ग्राम वासियों के आपत्ति करने पर उसे निरस्त कर दिया गया है। पंचायत के सरपंच और सचिव का कहना है कि पंचायत के फंड में शासन से कोई राशि मिल नहीं रही है। पंचायत के पास आय का अन्य स्त्रोत नहीं है इसलिए उक्त जमीन को भाड़े पर दे दिया गया था।

नोटिस लेने से बच रहा अग्रोहा
                       ग्राम पंचायत लाखा के सरपंच इंद्र कुमार पंडा ने जानकारी दी कि कब्जा छोड़ने और घेराव हटाने के लिए नोटिस भेजा गया है, लेकिन कम्पनी प्रबंधन नोटिस लेने में टाल-मटोल कर रहा है। अग्रोहा प्लांट द्वारा प्रतिमाह 15 हजार रुपए के दर से 6 माह का 90 हजार रूपये जमा कर दिया गया था जो इसी जून तक पूरा हो जायेगा।

देखिए क्या कहते हैं ग्रामीण

अग्रोहा की दबंगई का ग्रामीण देंगे जवाब
                            करीब एक माह से अधिक हुए पूर्व किरायानामा निरस्त होने के बावजूद अग्रोहा प्लांट द्वारा जबरन कब्जा करने से लोगो में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। चिराईपानी के रिटायर्ड टीचर विपिन कुमार डनसेना ने स्पष्ट कहा कि प्लांट पाली गाँव में स्थापित है तो पाली की जमीन ले हमारे गाँव चिराईपानी की जमीन पर क्यों कब्जा किया है? जब भाड़ा निरस्त हो गया है तो आज एक माह बाद भी कब्जा नहीं छोड़ रहा है। हमारी जमीन को कंपनी तत्काल मुक्त करे अन्यथा चिराईपानी के ग्रामीण अपने स्तर पर उग्र आंदोलन करेंगे।

पंचायत प्रतिनिधियों की विश्वसनीयता पर उठ रहे सवाल

गाँव में किसी भी बात को लेकर जब कोई निर्णय लेना होता है तो ग्रामसभा में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित होता है, लेकिन यहाँ तो ग्रामवासियों की बगैर जानकारी या सहमति के गाँव की उपयोगी जमीन को चुपके से अग्रोहा को दे दिया गया। जब घेराव किया तब ग्रामीणों को पता चला। इससे स्पष्ट होता है कि यहाँ जनता के चुने हुए पंचायत प्रतिनिधि, जनता को अँधेरे में रख आपस में बैठ कोई भी प्रस्ताव पास कर स्वार्थसिद्धि में लगे हुए हैं।


     

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