शिक्षा के मंदिरों में नवप्रवेशी बच्चों के भाल पर लगा तिलक, मिला दुलार

by SUNIL NAMDEO
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शाला प्रवेश उत्सव पर बिखरी खुशियां, हर नौनिहालों तक शिक्षा पहुंचाने और शाला त्यागी बच्चों की वापसी मुहिम का हुआ श्रीगणेश

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले में आज नए शिक्षा सत्र 2026-27 का शुभारंभ शाला प्रवेश उत्सव के साथ उत्साहपूर्ण वातावरण में हुआ। अवकाश के बाद जैसे ही विद्यालयों के द्वार खुले, बच्चों की चहल-पहल और किलकारियों से स्कूल परिसर गुलजार हो उठे। जिले के शासकीय विद्यालयों में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का पुष्पमाला पहनाकर, तिलक एवं गुलाल लगाकर आत्मीय स्वागत किया गया। विद्यालयों को आकर्षक ढंग से सजाया गया था, जिससे पहले ही दिन बच्चों में विद्यालय के प्रति अपनत्व और उत्साह का वातावरण दिखाई दिया।

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                                 शाला प्रवेश उत्सव पर जिले के विभिन्न विद्यालयों में जनप्रतिनिधियों, पालकों, शाला विकास समितियों के सदस्यों व गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय सहभागिता रही। अतिथियों ने बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए उन्हें नियमित अध्ययन, अनुशासन और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के महत्व से अवगत कराया। कई विद्यालयों में स्वागत गीत, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रेरणादायी गतिविधियों का भी आयोजन किया गया।

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                  इस दौरान विद्यार्थियों को निःशुल्क पाठ्य पुस्तकों एवं गणवेश का वितरण किया गया, जिससे वे नए सत्र की पढ़ाई प्रारंभ कर सकें। बच्चों के चेहरों पर नए सत्र, नई किताबों और नए सपनों को लेकर विशेष उत्साह देखने को मिला। विद्यालयों में शिक्षकों ने विद्यार्थियों से परिचयात्मक संवाद कर उन्हें सहज और प्रेरक वातावरण उपलब्ध कराया।

   गौरतलब है कि 27 जून तक चलने वाले शाला प्रवेश उत्सव के माध्यम से जिले में प्रवेश योग्य प्रत्येक बच्चे का शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने, विद्यालय से दूर बच्चों को पुनः शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने तथा नियमित उपस्थिति को बढ़ावा देने के लिए विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। जिला प्रशासन और स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा इसके लिए व्यापक स्तर पर तैयारी की गई है। प्रथम दिवस पर विद्यालयों में विद्यार्थियों की उत्साहजनक उपस्थिति दर्ज की गई। जिला प्रशासन ने पालकों एवं नागरिकों से अपील की है कि वे प्रत्येक बच्चे की नियमित शिक्षा सुनिश्चित करने में सहयोग करें, ताकि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा के अधिकार से वंचित न रहे और शाला प्रवेश उत्सव जनभागीदारी का प्रभावी अभियान बन सके।

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