इंजीनियर बने, फिर बने कॉमर्स के टॉपर, गोपाल पटेल की सफलता की कहानी बनी मिसाल

by SUNIL NAMDEO
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नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच जारी रखी पढ़ाई, विश्वविद्यालय में हासिल किया प्रथम स्थान, राज्यपाल रमेन डेका के हाथों मिले दो स्वर्ण पदक

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। यदि मन में कुछ कर गुजरने का जुनून हो और लक्ष्य के प्रति दृढ़ संकल्प हो, तो परिस्थितियां भी सफलता की राह नहीं रोक सकतीं। इस बात को रायगढ़ जिले के पटेलपाली निवासी गोपाल पटेल ने अपनी उपलब्धि से साबित कर दिखाया है। मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने वाणिज्य विषय में भी अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। नौकरी व पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए विश्वविद्यालय में प्रथम स्थान हासिल करना और एक साथ दो स्वर्ण पदक प्राप्त करना उनकी मेहनत, लगन और शिक्षा के प्रति समर्पण की प्रेरणादायक मिसाल है।

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पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय, बिलासपुर, छत्तीसगढ़ के सप्तम दीक्षांत समारोह में 3 नवंबर 2026 को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका के हाथों गोपाल पटेल को दो स्वर्ण पदकों से सम्मानित किया गया। बी.कॉम. परीक्षा 2024 में 7.91 सीजीपीए प्राप्त कर विश्वविद्यालय की प्रावीण्य सूची में प्रथम स्थान हासिल करने पर उन्हें यह गौरव प्राप्त हुआ। गोपाल को प्रथम स्वर्ण पदक पंडित सुंदरलाल शर्मा (मुक्त) विश्वविद्यालय स्वर्ण पदक तथा दूसरा स्व. श्रीमती किशोरी देवी एवं स्व. मुरलीधर पटेरिया स्मृति स्वर्ण पदक दिया गया। राज्यपाल के हाथों मिले इस सम्मान ने उनकी वर्षों की मेहनत को एक नई पहचान दिलाई है।

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इंजीनियरिंग से कॉमर्स तक का प्रेरणादायक सफर

गोपाल की शैक्षणिक यात्रा भी प्रेरणादायक रही है। उन्होंने वर्ष 2014 में मैकेनिकल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की थी। तकनीकी शिक्षा हासिल करने के बाद भी उनकी सीखने और आगे बढ़ने की इच्छा बनी रही। इसी क्रम में वर्ष 2022 में उन्होंने बीकॉम में प्रवेश लेकर वाणिज्य विषय में अपनी नई शैक्षणिक यात्रा शुरू की। अलग-अलग विषयों में अपनी रुचि और क्षमता का परिचय देते हुए उन्होंने बीकॉम में विश्वविद्यालय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया। उन्होंने उत्तम महाविद्यालय, रायगढ़ के अध्ययन केंद्र के माध्यम से बीकॉम की पढ़ाई पूरी की, जबकि उनकी परीक्षाओं का केंद्र किरोड़ीमल शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, रायगढ़ था।

नौकरी के साथ पढ़ाई कर हासिल की बड़ी उपलब्धि

विशेष उल्लेखनीय है कि गोपाल वर्तमान में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, झलमला में सहायक ग्रेड-3 के पद पर कार्यरत हैं। शासकीय सेवा के दायित्वों का निर्वहन करते हुए पढ़ाई के लिए समय निकालना उनके लिए एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य से कभी समझौता नहीं किया। नियमित अध्ययन, समय के सदुपयोग और निरंतर मेहनत के बल पर उन्होंने विश्वविद्यालय में सर्वोच्च स्थान प्राप्त कर यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति के सामने कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती।

पत्नी नीलम का सहयोग बना सफलता की मजबूत नींव

गोपाल की इस उपलब्धि के पीछे उनके परिवार का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता, पत्नी नीलम पटेल, मित्रों एवं विद्यालय के सहकर्मियों को दिया है। विशेष रूप से उन्होंने अपनी पत्नी नीलम पटेल के सहयोग, विश्वास और प्रोत्साहन को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण आधार बताया। नौकरी की व्यस्तता और पढ़ाई के बीच संतुलन बनाए रखने के दौरान पत्नी नीलम ने हर कदम पर उनका हौसला बढ़ाया। उनके सपनों को समझते हुए निरंतर प्रोत्साहित किया और कठिन परिस्थितियों में भी उनका आत्मविश्वास बनाए रखा। जीवनसाथी के रूप में मिला यह सहयोग उनकी शैक्षणिक यात्रा में काफी महत्वपूर्ण रहा। गोपाल की यह उपलब्धि केवल उनकी व्यक्तिगत मेहनत का परिणाम नहीं, बल्कि परिवार के आपसी विश्वास, त्याग, सहयोग और सामूहिक प्रयासों की भी गौरवपूर्ण कहानी है। इन दोनों स्वर्ण पदकों की चमक में पत्नी नीलम के सहयोग और परिवार के प्रोत्साहन की भी अहम भूमिका रही है।

युवाओं के लिए बने प्रेरणास्रोत

गोपाल पटेल की यह उपलब्धि उन युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत है, जो नौकरी और पारिवारिक जिम्मेदारियों के कारण अपनी आगे की पढ़ाई का सपना अधूरा छोड़ देते हैं। उन्होंने अपने प्रयासों से यह संदेश दिया है कि शिक्षा प्राप्त करने की कोई उम्र नहीं होती। यदि व्यक्ति के भीतर सीखने की ललक और लक्ष्य प्राप्त करने का दृढ़ संकल्प हो, तो व्यस्त दिनचर्या के बावजूद बड़ी उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं। अब गोपाल का अगला लक्ष्य एम. कॉम. की पढ़ाई पूरी कर वाणिज्य के क्षेत्र में अपनी शैक्षणिक योग्यता और विशेषज्ञता को आगे बढ़ाना है। उनकी इस दोहरी स्वर्णिम उपलब्धि से पटेलपाली गांव सहित परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में हर्ष एवं गौरव का माहौल है।

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