वित्तमंत्री ने 50 लाख से बनने वाले बीईओ ऑफिस बिल्डिंग के लिए किया भूमिपूजन, जिला स्तरीय शाला प्रवेश उत्सव के बने साक्षी

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले के नगर पंचायत पुसौर में स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय परिसर में गुरुवार को जिला स्तरीय शाला प्रवेशोत्सव-2026 उत्साह और गरिमामय वातावरण में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश के वित्त मंत्री तथा रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने 50 लाख रुपए की लागत से बनने वाले विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय भवन के लिए भूमिपूजन किया। कार्यक्रम में नवप्रवेशी विद्यार्थियों का तिलक लगाकर स्वागत किया गया तथा शिक्षा को उत्सव का स्वरूप देते हुए विद्यार्थियों को विभिन्न शैक्षणिक सामग्री का वितरण किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत मां सरस्वती एवं छत्तीसगढ़ महतारी के पूजन-अर्चन तथा दीप प्रज्ज्वलन से हुई। विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि ओपी चौधरी ने कहा कि किसी भी बच्चे के विद्यालय में प्रवेश के साथ ही उसके सपनों को नई उड़ान मिलती है। शिक्षा वह शक्ति है जो व्यक्ति का ही नहीं, पूरे समाज का भविष्य बदल सकती है। उन्होंने अपने संघर्षपूर्ण जीवन के अनुभव साझा करते हुए बताया कि सीमित संसाधनों के बावजूद लक्ष्य और योजनाबद्ध तैयारी से उन्होंने भारतीय प्रशासनिक सेवा तक का सफर तय किया। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि अभी से अपना लक्ष्य निर्धारित करें और उसी के अनुरूप मेहनत करें। केवल पढ़ाई करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी तय होना चाहिए कि जीवन में क्या बनना है।
वित्तमंत्री ने आगे कहा कि आज हमारे प्रदेश में राष्ट्रीय स्तर के अनेक शैक्षणिक संस्थान और अवसर उपलब्ध हैं, जिनकी जानकारी विद्यार्थियों तक पहुंचाना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। यदि कोई विद्यार्थी राष्ट्रीय संस्थानों में प्रवेश प्राप्त करता है तो उसे हरसंभव सहयोग दिया जाएगा। राज्य सरकार प्रतिभाशाली अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को आईएएस जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली भेज रही है, जहां रहने और पढ़ाई का खर्च सरकार वहन करती है। उन्होंने कहा कि प्रतिभा के सामने गरीबी कभी बाधा नहीं बन सकती। इस दौरान उन्होंने जिन शिक्षकों के बच्चे सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत हैं, उनका मंच से सम्मान भी किया गया। उन्होंने प्राचार्यों और शिक्षकों से आह्वान किया कि वे ऐसे उत्कृष्ट विद्यालय विकसित करें, जहां अपने बच्चों का प्रवेश दिलाने के लिए लोग स्वयं आग्रह करें। उन्होंने बताया कि प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में लगातार आधारभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए पुसौर में भी नर्सिंग कॉलेज और नालंदा परिसर बनाया जा रहा है। उन्होंने विद्यार्थियों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के लिए निरंतर प्रयास करने की प्रेरणा दी।
स्कूल जाना बच्चों के लिए त्योहार जैसा अनुभव बने: कलेक्टर
कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य केवल नए विद्यार्थियों का प्रवेश कराना नहीं, बल्कि विद्यालय आने को बच्चों के लिए उत्सव जैसा अनुभव बनाना है। उन्होंने अभिभावकों से आग्रह किया कि घर में बच्चों के लिए पढ़ाई का एक विशेष कोना तैयार करें, जहां पुस्तकें और बस्ता व्यवस्थित रखें, ताकि बच्चों में अध्ययन के प्रति आत्मीयता विकसित हो। अभिभावक प्रतिदिन बच्चों से यह अवश्य पूछें कि आज विद्यालय में क्या नया सीखा। कलेक्टर ने शिक्षकों से कहा कि कोई भी बच्चा पढ़ाई बीच में न छोड़े। पाठ्यक्रम की पुस्तकों के अतिरिक्त प्रत्येक विद्यार्थी को वर्ष में कम से कम दो अतिरिक्त पुस्तकें-जैसे महापुरुषों की जीवनी, प्रेरक साहित्य अथवा कहानी संग्रह-पढ़ने के लिए प्रेरित किया जाए, जिससे उनमें व्यापक दृष्टिकोण विकसित हो। जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू ने कहा कि शाला प्रवेशोत्सव का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले का कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे और प्रत्येक विद्यार्थी उत्साहपूर्वक विद्यालय से जुड़े।
मेधावी, दिव्यांग छात्रा, सेवानिवृत्त शिक्षकों का हुआ सम्मान
कार्यक्रम में कक्षा 10 एवं 12 की बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले क्षेत्र के 50 से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। पूर्णतः दृष्टिबाधित छात्रा कामिनी यादव को 86 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर विशेष रूप से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही विद्यालय के सेवानिवृत्त शिक्षकों का भी सम्मान किया गया। स्कूली छात्राओं को सायकल और नवप्रवेशी बच्चों को पाठ्यपुस्तकें, गणवेश तथा अन्य आवश्यक शैक्षणिक सामग्री वितरित की गई। कार्यक्रम में न्योता भोज का भी आयोजन किया गया। समारोह में जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, अभिभावकों और विद्यार्थियों की बड़ी भागीदारी ने शाला प्रवेशोत्सव को जनउत्सव का स्वरूप प्रदान किया।







