स्कूलों में शिक्षक पढ़ाने की बजाए मोबाइल फोन में बिजी दिखे तो खैर नहीं

by SUNIL NAMDEO
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कलेक्टर ने शिक्षा विभाग की ली समीक्षा बैठक, कहा – शिक्षा की गुणवत्ता में कोई भी समझौता बर्दाश्त नहीं

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले के सरकारी विद्यालयों में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ शिक्षा की गुणवत्ता को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन ने व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने शुक्रवार को शिक्षा विभाग की समीक्षा बैठक में कहा कि विद्यालयों का उद्देश्य केवल पठन-पाठन संचालित करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना और उसके सीखने के स्तर में निरंतर सुधार सुनिश्चित करना है। उन्होंने सभी विद्यालयों में शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, समय पर कक्षाओं का संचालन, प्रभावी अध्यापन तथा विद्यार्थियों की शैक्षणिक प्रगति की सतत निगरानी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा तथा लापरवाही बरतने वालों की जवाबदेही तय कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

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                       कलेक्टर ने कहा कि शासकीय विद्यालयों में पढ़ने वाले अधिकांश बच्चे ऐसे परिवारों से आते हैं, जिनके लिए शिक्षा ही बेहतर भविष्य का सबसे बड़ा आधार है। इसलिए प्रत्येक शिक्षक अपनी जिम्मेदारी का गंभीरता से निर्वहन करे और विद्यालय का पूरा समय विद्यार्थियों के अध्यापन, मार्गदर्शन तथा सीखने का बेहतर वातावरण तैयार करने में लगाए। उन्होंने कहा कि विद्यालयों में केवल शिक्षकों की उपस्थिति नहीं, बल्कि कक्षाओं में गुणवत्तापूर्ण अध्यापन और उसका परिणाम भी दिखाई देना चाहिए। कलेक्टर ने अभिभावकों एवं आम नागरिकों से विशेष अपील करते हुए कहा कि यदि किसी विद्यालय में शिक्षक बच्चों की पढ़ाई पर ध्यान देने के बजाय मोबाइल फोन के अनावश्यक उपयोग अथवा अन्य गैर-शैक्षणिक गतिविधियों में संलग्न रहते हों और इससे विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित हो रही हो, तो इसकी जानकारी सीधे कलेक्टर अथवा जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को दें। शिकायत प्राप्त होने पर तत्काल जांच कर नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने में समाज और अभिभावकों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।

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                कलेक्टर ने सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारियों से कहा कि विद्यालयों का नियमित निरीक्षण केवल औपचारिकता न रहे, बल्कि कक्षाओं में जाकर अध्यापन व्यवस्था, विद्यार्थियों की सीखने की क्षमता और शैक्षणिक प्रगति का गंभीरता से मूल्यांकन किया जाए। यदि किसी विद्यालय में लगातार शिकायतें मिलती हैं अथवा अपेक्षित शैक्षणिक सुधार नहीं दिखता है, तो संबंधित शिक्षक के साथ-साथ प्राचार्य, संकुल समन्वयक और विकासखंड शिक्षा अधिकारी की भी जवाबदेही तय की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विकासखंड की प्रगति की नियमित समीक्षा होगी और आवश्यक होने पर प्रशासनिक निर्णय भी लिए जाएंगे। उन्होंने नए प्रवेश लेने वाले सभी विद्यार्थियों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने, ड्रॉपआउट बच्चों को पुनः विद्यालयों से जोड़ने तथा पंचायत प्रतिनिधियों एवं अभिभावकों के सहयोग से कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रहे, इसके लिए विशेष अभियान चलाने के निर्देश दिए। साथ ही एकल शिक्षक वाले विद्यालयों में आवश्यक व्यवस्था, भवनविहीन एवं जर्जर विद्यालयों में वैकल्पिक व्यवस्था, विद्यार्थियों के स्वास्थ्य परीक्षण, मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता, विद्यालय परिसरों में मुनगा सहित पोषणयुक्त पौधों का रोपण तथा प्रत्येक विकासखंड में मॉडल स्कूल विकसित करने के निर्देश भी दिए।

                              बैठक में वर्ष 2025-26 के बोर्ड परीक्षा परिणाम, कमजोर एवं अनुत्तीर्ण विद्यार्थियों के लिए विशेष कार्ययोजना, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सुविधाएं, समग्र शिक्षा, राष्ट्रीय साधन-सह-मेधा छात्रवृत्ति परीक्षा तथा विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं की भी विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही उन्होंने निजी विद्यालयों के प्राचार्यों की आगामी सप्ताह बैठक लेकर शासन के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश डीईओ एवं डीएमसी को दिए। बैठक में जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अभिजीत बबन पठारे, सहायक कलेक्टर गोकुल आर. के., जिला शिक्षा अधिकारी श्यामानंद साहू, डीएमसी आलोक स्वर्णकार, सभी विकासखंड शिक्षा अधिकारी, एबीईओ, बीआरसी तथा शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारी उपस्थित थे।

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