जिला अस्पताल और बस स्टैंड क्षेत्र में हुआ नुक्कड़-नाटक

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। तम्बाकू और निकोटीन उत्पादों के बढ़ते दुष्प्रभावों के प्रति समाज को जागरूक बनाने तथा नशे की प्रवृत्ति पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से राष्ट्रीय तम्बाकू निषेध दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाया गया। कलेक्टर के निर्देशानुसार जिला तम्बाकू नियंत्रण कार्यक्रम के अंतर्गत विभिन्न गतिविधियों का आयोजन किया गया।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अनिल कुमार जगत, सिविल सर्जन डॉ. दिनेश पटेल, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री रंजना पैकरा एवं जिला नोडल अधिकारी डॉ. विवेक उपाध्याय के मार्गदर्शन में आयोजित अभियान के तहत गजेन्द्र प्रसाद कला दल द्वारा केवड़ाबाड़ी बस स्टैंड क्षेत्र एवं जिला चिकित्सालय परिसर में प्रभावशाली नुक्कड़ नाटक प्रस्तुत किया गया। इस वर्ष की थीम ‘आकर्षण का पर्दाफाश करनाः निकोटीन और तंबाकू की लत का मुकाबला करना’ पर आधारित नाटक के माध्यम से आमजन को तम्बाकू एवं निकोटीन उत्पादों के दुष्प्रभावों, उनसे होने वाली गंभीर बीमारियों तथा नशे की लत से मुक्ति के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। साथ ही निकोटिन गम एवं निकोटिन पैच जैसे तम्बाकू छोड़ने में सहायक विकल्पों की भी जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम के दौरान नागरिकों को कोटपा अधिनियम-2003 के विभिन्न प्रावधानों से अवगत कराया गया। तम्बाकू उत्पादों के विज्ञापन, बिक्री एवं प्रचार-प्रसार पर लागू प्रतिबंधों की जानकारी देते हुए बताया गया कि 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों को तम्बाकू उत्पादों की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित है। सार्वजनिक स्थलों जैसे अस्पताल, विद्यालय, महाविद्यालय, कार्यालय, बस एवं रेलवे स्टेशन तथा धार्मिक स्थलों पर धूम्रपान निषेध नियमों का पालन सुनिश्चित करने और निर्धारित चेतावनी बोर्ड प्रदर्शित करने के लिए भी लोगों को प्रेरित किया गया। स्वास्थ्य विभाग की टीम द्वारा बताया गया कि तम्बाकू उत्पादों के अवैध प्रचार-प्रसार एवं नियमों के उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों के विरुद्ध नियमित रूप से चालानी कार्रवाई की जा रही है। अभियान के माध्यम से नागरिकों से तम्बाकू सेवन से दूर रहने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की गई। ’जिंदगी चुनो, तम्बाकू नहीं’ के संदेश के साथ जिले को तम्बाकू मुक्त एवं स्वच्छ बनाने का संकल्प दोहराया गया। कार्यक्रम संचालन में श्रीमती उमा महंत, श्रीमती सीमा बरेठ एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट सुश्री ज्योति खरे का विशेष योगदान रहा।







