सुनील इस्पात, महालक्ष्मी कास्टिंग, वेजरान इंडस्ट्रीज के दो प्लांट, ओम श्री रुपेश स्टील, रीयल वायर कंपनी की वाहनों की आवाजाही से रोड हुआ खतरनाक

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले के ग्राम पंचायत लाखा के चिराईपानी-गेरवानी पहुंच मार्ग की जर्जर स्थिति को लेकर गुजरे जुलाई 2025 में आक्रोशित ग्रामीणों ने चक्काजाम किया था। हालांकि, जनाक्रोश को देख प्रशासन के समक्ष जिम्मेदार कंपनियों ने 1 माह में बनाने का लिखित आश्वासन जरूर दिया था। अब जुलाई 2026 आ गया, लेकिन हालात जस के तस हैं। सूखे दिनों में धूल खाये अब बारिश में कीचड़ की मार झेल रहे लोगों की परेशानी को देखकर भी जनप्रतिनिधि और नेता क्यों चुप्पी साधे हैं। क्या यही दिन देखने के लिए जनता अपना उम्मीदवार चुनती है। यही वजह है कि इस क्षेत्र में आधे दर्जन कंपनियों के वाहनों की रेलमपेल के चलते रोड की दुर्दशा से भड़के ग्रामीण अब आंदोलन का मूड बना रहे हैं।
एक कहावत है “सच्चे का बोलबाला, झूठे का मुँह काला” लेकिन भ्रष्टाचार के जमाने में यह कहावत लुप्त होती नजर आ रही है। जमीनी हकीकत यह है कि दिखने में भरोसेमंद लोग ही झूठा वादा कर अपनी-अपनी रोटियाँ सेंकने में मशगूल हैं और पीड़ित जनता पहाड़ पर बैठे बन्दर की तरह टुकुर-टुकुर ताकने को मजबूर है। हम बात कर रहे हैं ग्राम पंचायत लाखा की। इसके आश्रित ग्राम चिराईपानी से गेरवानी पहुँच मार्ग की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इस मार्ग से जुड़े कई औद्योगिक इकाइयां स्थापित हैं। इनमें सुनील इस्पात एन्ड पॉवर लिमिटेड, महालक्ष्मी कास्टिंग, वेजरान इंडस्ट्रीज के दो प्लांट, ओम श्री रुपेश स्टील, रीयल वायर आदि कम्पनियाँ प्रमुख हैं। यहाँ भारी-भरकम वाहनों की आवाजाही से इस कच्चे सड़क की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गयी है। बता दें कि, ग्रामीणों के आने-जाने का यही एकमात्र रास्ता है।
बीते साल 2025 के जुलाई महीने में सड़क निर्माण को लेकर ग्रामवासियों ने आर्थिक नाकेबंदी की थी। घंटों जाम के बाद प्रशासन हरकत में आया और तत्कालीन अतिरिक्त तहसीलदार अनुराधा पटेल मौके पर पहुँची। सभी कंपनियों के प्रतिनिधि भी पहुँचे और बातचीत के बाद कम्पनियों द्वारा 1 माह के भीतर सड़क बनाकर देने का आश्वासन दिया गया। वहीं, सड़क किनारे जहाँ-तहाँ ट्रकें खड़ी कर दिए जाने की शिकायत पर तहसीलदार मैडम ने फटकार लगाते हुए वाहनों को अपने – अपने पार्क में लगाने को कहा और वहाँ मौजूद पुलिस को चालानी कार्रवाई के निर्देश दिए। प्रशासनिक अधिकारी के समक्ष दिए गए आश्वासन पर ग्रामीणों ने भरोसा करते हुए आंदोलन समाप्त कर दिया, लेकिन तय समय गुजर जाने के बाद भी कंपनियों की ओर से सड़क निर्माण को लेकर कोई ठोस पहल नहीं हुई।
मजबूर होकर ग्रामीणों को पुनः आंदोलन करना पड़ा। इस बार प्रशासन की ओर से तहसीलदार शिव कुमार डनसेना आये। उन्होंने भी ग्रामीणों के सामने बड़े दावे के साथ कंपनियों द्वारा सड़क बनवाने का आश्वासन दिया। कंपनी प्रतिनिधियों ने भी लिखित में आश्वासन दिया और बारिश का हवाला देते हुए तत्काल में मरम्मत कराने की बात कही उसके बाद मौसम खुल जाने के बाद पक्की सड़क बनाकर देने का वादा किया। भोली-भाली ग्रामीण जनता झाँसे में आ गयी और आंदोलन समाप्त कर दिया। शुरुआत में कंपनियों ने दिखावे के लिए गड्ढों को स्लेक चूरा से पाट कर लीपा-पोती कर दिया जो कुछ दिनों तक ठीक रहा उसके बाद फिर वही हाल हो गया।
दोमुंहे निकले कंपनी संचालक
गरीब ग्रामीणों की सड़क पर चलकर हजारों-लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों कमाने वाली ये कम्पनियाँ महज डेढ़ से दो किलोमीटर सड़क नहीं बनवा पा रहे हैं, जबकि ज्यादातर उन्हीं की ही गाड़ियाँ चलती हैं। जो अपनी ही सुविधा के लिए नहीं सोच रहे, भला इनसे सामाजिक उत्तरदायित्व निर्वहन की उम्मीद कैसे की जा सकती है? जब ग्रामवासियों ने इनकी आर्थिक नाकेबंदी कर दी तो एक पाँव पर दौड़े चले आये थे और सड़क को एक माह में पक्की बनवाने का आश्वासन लिखित में देकर ग्रामीणों और प्रशासन को झुनझुना थमा गए।
प्रशासनिक अफसरों की भी नहीं रही अहमियत
वादा खिलाफी में माहिर इन कंपनियों के हौसले इतने बढ़ गए हैं कि इन्हें प्रशासन का रत्ती भर भी कोई भय नहीं है। दोनों आंदोलनों में आये एक नहीं दो-दो तहसीलदारों के समक्ष इनके प्रतिनिधियों ने सड़क बनवाने का लिखित में भरोसा दिया था, लेकिन वो भरोसा सिर्फ कागज का टुकड़ा निकला। पूरा साल गुजर गया, परन्तु सड़क की हालत नहीं सुधरी। अधिकारियों ने भी सड़क मरम्मत व निर्माण को लेकर कोई रूचि नहीं दिखायी।

जिसकी लाठी उसकी भैंस
“जिसकी लाठी उसकी भैंस” एक प्रसिद्ध हिंदी कहावत है। इसका सीधा सा अर्थ है “शक्तिशाली की ही जीत होती है” अर्थात् जिसके पास जितना पैसा है वो उतना ही ताकतवर है, उसी का बोलबाला होता है। यहाँ धन-कुबेरों के आगे पूरा सिस्टम लकवाग्रस्त हो चुका है। उद्योग प्रबंधनों की मनमानी चरम सीमा पर है। कहीं कोई जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है तो कोई प्रदूषण फैला रहा है। लोग त्राहिमाम्-त्राहिमाम् कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि गाँव की सरकार में जनता ने इस बार प्रभावशाली और दमदार प्रतिनिधियों को चुनकर भेजा है लेकिन विडंबना यह है कि ग्रामीण जनता आज भी समस्याओं से जूझने को मजबूर है।

क्या कहते हैं सुनील इस्पात प्रबंधन
सुनील इस्पात एंड पावर लिमिटेड के डायरेक्टर प्रमोद तोला का कहना है कि चिराईपानी से गेरवानी रोड की दुर्दशा के हम अकेले जिम्मेदार नहीं है। कई और भी कंपनियों की गाड़ियां इसमें चलती है। खस्ताहाल सड़क की तकदीर संवारने का प्रयास जारी है।
वेजरॉन इंडस्ट्रीज के जीएम नहीं उठाते फोन
वहीं, सृजन न्यूज ने जब वेजरॉन इंडस्ट्रीज के जीएम अंतर्यामी प्रधान का पक्ष जानने के लिए फोन किया तो पूरी घण्टी घनघनाने के बावजूद उन्होंने रिसीव नहीं किया। और तो और जीएम प्रधान ने फोन का जवाब देने की बजाए कॉल बैक करना भी मुनासिब नहीं समझा।







