ओपी जिंदल थे कर्मठता और आत्मनिर्भर भारत के प्रतीक : अलका गोडबोले

by SUNIL NAMDEO
0 comments

ओपी जिंदल विद्यालय तराईमाल में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया संस्थापक दिवस

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिंदल समूह के संस्थापक स्व. ओमप्रकाश जिंदल की जयंती पर ओ.पी. जिंदल विद्यालय, तराईमाल में 7 अगस्त को संस्थापक दिवस श्रद्धा एवं उल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं ने गीत, नृत्य एवं कविता प्रस्तुत कर वातावरण में उत्साह का संचार किया।

rl
previous arrow
next arrow

कार्यक्रम में दो विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहीं। प्रीति वैष्णव, राष्ट्रीय कथक नृत्यांगना एवं वैष्णवी संगीत महाविद्यालय, सारंगढ़ शाखा की उप-प्राचार्या तथा हेमलता बूसा, भरतनाट्यम नृत्य शिक्षिका एवं श्री साई नाट्य स्पर्श डांस ग्रुप की संस्थापिका। विद्यालय की प्राचार्या श्रीमती अलका गोडबोले ने अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंटकर आत्मीय स्वागत किया। कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती पूजन एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। छात्र-छात्राओं ने स्वागत गीत एवं सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कार्यक्रम का विशेष आकर्षण नर्सरी से यूकेजी के बच्चों की फैंसी ड्रेस प्रतियोगिता रही। नन्हे-नन्हे बच्चों ने राधा-कृष्ण, डॉक्टर, शिक्षक, सैनिक और फूलों के रूप में मंच पर प्रस्तुति दी। रंग-बिरंगे परिधानों और मनमोहक अभिनय ने दर्शकों की खूब तालियां बटोरीं।

balaji
previous arrow
next arrow

प्राचार्या अलका गोडबोले ने कहा कि स्व. ओपी जिंदल कर्मठता व आत्मनिर्भर भारत के प्रतीक थे। उनके आदर्श परिश्रम, अनुशासन और राष्ट्र सेवा हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। हमारा विद्यालय भी इन्हीं मूल्यों के साथ विद्यार्थियों को संस्कारित नागरिक बनाने के लिए संकल्पित है। मंच संचालन विद्यालय नायक पीयूष दर्शन ने किया। इसके पश्चात कक्षा छठवीं के छात्र अंकित पटेल ने स्व. ओ.पी. जिंदल के जीवन और संघर्ष पर आधारित कविता पाठ कर सभी को भावविभोर कर दिया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सदनवार सामूहिक नृत्य प्रतियोगिता रही। आज़ाद, भगत, सुभाष एवं तिलक सदन के विद्यार्थियों ने विभिन्न राज्यों के लोकगीतों पर आधारित मनोहारी नृत्य प्रस्तुत किए। सदन नृत्य स्पर्धा में भगत सदन ने छत्तीसगढ़ी लोकगीत पर प्रथम स्थान, आज़ाद सदन ने बंगाली लोकगीत पर द्वितीय स्थान, तिलक सदन ने मराठी लोकगीत पर तृतीय स्थान प्राप्त किया, जबकि सुभाष सदन को ओड़िया लोकगीत पर सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

परिणाम घोषणा के पश्चात प्राचार्या ने विजेता सदनों को बधाई देते हुए कहा कि आपकी मेहनत और अनुशासन अनुकरणीय है। उन्होंने सभी चारों सदनों के नृत्य मार्गदर्शकों एवं प्रशिक्षकों की भी सराहना करते हुए कहा कि बच्चों को मंच के योग्य बनाने में आपका परिश्रम सबसे बड़ा है। विजेता प्रतिभागियों को मुख्य अतिथियों, प्राचार्या द्वारा ट्रॉफी एवं प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया।

Related Posts