पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के प्रभावित परिवारों के पुनर्वास में उनके हितों का रखें विशेष ध्यान : मयंक चतुर्वेदी

by SUNIL NAMDEO
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कलेक्टर ने प्रभावित परिवारों के लिए उपयुक्त शासकीय भूमि चिन्हांकन और ग्रामवासियों की सहमति से पुनर्व्यवस्थापन स्थल तय करने के दिए निर्देश, रोजगार के लिए डिसेंडिंग ऑर्डर एंड क्लबिंग कॉन्सेप्ट का परीक्षण, कम सर्किल रेट वाले ग्रामों में अतिरिक्त पुनर्वास लाभ देने पर जोर

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी की अध्यक्षता में आज एसईसीएल की पेलमा ओपन कास्ट परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन को व्यवस्थित, पारदर्शी और नियमानुसार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जिला स्तरीय पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन समिति की बैठक आज कलेक्टोरेट के सृजन सभाकक्ष में आयोजित की गई। बैठक में परियोजना के लिए भूमि अर्जन से प्रभावित ग्रामों के परिवारों के पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन, रोजगार एवं अन्य पुनर्वास लाभों से संबंधित विभिन्न बिंदुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में एसईसीएल की पेलमा ओपन कास्ट परियोजना के लिए भूमि अर्जित किए गए पेलमा, उरबा, लालपुर, मड़वाडूमर, सकता, मिलूपारा, खर्रा, हिन्झर एवं जरहिडीह, कुल 09 ग्रामों के परियोजना प्रभावित परिवारों से जुड़े विषयों की समीक्षा की गई। समिति द्वारा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मिलने वाले पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभों तथा उनके लिए आवश्यक सुविधाओं को लेकर अधिकारियों एवं एसईसीएल के प्रतिनिधियों से जानकारी ली गई। बैठक में अपर कलेक्टर रवि राही, एसडीएम प्रवीण तिवारी, एसईसीएल के अधिकारी, जिलास्तरीय पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन समिति के सदस्यगण तथा संबंधित ग्राम पंचायत के ग्रामीण जन उपस्थित थे।

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अधिनियम और नीतियों के अनुरूप पुनर्वास सुनिश्चित करने के निर्देश

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कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने निर्देशित किया कि सभी परियोजना प्रभावित परिवारों का पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन तथा अन्य लागू अधिनियमों एवं शासन की नीतियों के अनुरूप समुचित रूप से सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि भूमि अर्जन के कारण प्रभावित होने वाले परिवारों के हितों का विशेष ध्यान रखते हुए उन्हें नियम के अनुसार सभी पात्र लाभ उपलब्ध कराए जाएं। कलेक्टर ने जिले में उपलब्ध शासकीय भूमियों का चिन्हांकन करने के निर्देश भी दिए, ताकि परियोजना प्रभावित परिवारों के पुनर्व्यवस्थापन के लिए उपयुक्त स्थल उपलब्ध कराया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुनर्व्यवस्थापन स्थल के चयन में संबंधित ग्रामवासियों की राय एवं परामर्श को भी महत्व दिया जाए, ताकि प्रभावित परिवारों के लिए सुविधाजनक एवं स्वीकार्य स्थान का चयन किया जा सके।

रोजगार के लिए डिसेंडिंग ऑर्डर और क्लबिंग कॉन्सेप्ट का होगा परीक्षण

बैठक में परियोजना प्रभावित परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराने से जुड़े विषय पर भी विस्तार से चर्चा की गई। कलेक्टर ने निर्देशित किया कि कोल इंडिया लिमिटेड की पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन नीति के अंतर्गत रोजगार प्रदान करने के लिए अपनाए जाने वाले ‘डिसेंडिंग ऑर्डर कॉन्सेप्ट’ एवं ‘क्लबिंग कॉन्सेप्ट’ का परीक्षण किया जाए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि दोनों व्यवस्थाओं का तुलनात्मक परीक्षण कर यह चिन्हांकित किया जाए कि प्रभावित परिवारों के हित में कौन-सी व्यवस्था अधिक उपयुक्त एवं लाभप्रद होगी। इसके आधार पर रोजगार संबंधी प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं हितग्राही-केंद्रित बनाने की दिशा में आवश्यक कार्रवाई की जाए।

कम सर्किल रेट वाले ग्रामों में अतिरिक्त पुनर्वास लाभ देने पर जोर

बैठक में ग्राम हिन्झर एवं जरहिडीह से संबंधित विषयों पर भी विशेष रूप से चर्चा की गई। कलेक्टर ने एसईसीएल के प्रतिनिधियों को निर्देशित किया कि इन दोनों ग्रामों की भूमि का सर्किल रेट अपेक्षाकृत कम होने के कारण प्रभावित ग्रामवासियों के हितों को ध्यान में रखते हुए इसकी भरपाई के लिए उन्हें कुछ अतिरिक्त पुनर्वास एवं पुनर्व्यवस्थापन लाभ प्रदान करने की दिशा में आवश्यक पहल की जाए। उन्होंने कहा कि परियोजना से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की प्रक्रिया केवल भूमि अर्जन तक सीमित न रहे, बल्कि उनके सामाजिक एवं आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समुचित पुनर्व्यवस्थापन की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। बैठक में प्रभावित परिवारों को मिलने वाले लाभ, पुनर्व्यवस्थापन स्थल, रोजगार तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं से संबंधित विषयों पर अधिकारियों एवं एसईसीएल के प्रतिनिधियों के साथ विस्तृत विचार-विमर्श किया गया।

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