Home रायगढ़ न्यूज गांधीवादी परंपरा के शिक्षक कृपाराम प्रधान हुए सेवानिवृत्त

गांधीवादी परंपरा के शिक्षक कृपाराम प्रधान हुए सेवानिवृत्त

by SUNIL NAMDEO

पूर्वांचल के सुदूर गांव कोयलंगा में शताधिक छात्रों और पालकों ने शिक्षाविद को दी भावभीनी विदाई

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। पूर्वांचल में शासकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय कोयलंगा (संकुल शाउमावि जामगांव रायगढ़) से सेवानिवृत्त शिक्षक कृपाराम प्रधान का विदाई समारोह 14 फरवरी  को ग्रामीण पालकों, छात्र छात्राओं और संकुल शिक्षकों की उपस्थिति में उल्लासपूर्ण वातावरण में दोपहर भोज के साथ सम्पन्न हुआ।

               उन्होंने 43 वर्ष 3 माह और 25 दिनों तक बतौर शिक्षक अपनी सेवाएं देकर बच्चों को मार्गदर्शन दिया। एक साथ शताधिक की संख्या में लोगों की उपस्थिति यह प्रमाणित करती रही कि शिक्षकों के प्रति श्रद्धा भाव और ग्रामीणों में सांस्कृतिक एकता की भावना कुछ जगहों में आज भी जीवित हैं। कोयलंगा इसका जीवंत उदाहरण है। विनम्र , सदाचारी और सत्य अहिंसा के रास्ते पर चलकर बच्चों को शिक्षा देते आ रहे गांधीवादी परंपरा के शिक्षक कृपाराम प्रधान के सम्मान में प्रशस्ति पत्र का वाचन विद्यालय की शिक्षिका सोनिया पटेल ने किया। सरस्वती प्रतिमा पर माल्यार्पण के उपरांत कृपाराम प्रधान का शाल और श्रीफल से सम्मान प्रधान पाठक विजय नंदे, जामगांव संकुल प्राचार्य रमेश शर्मा, सीएसी रोहित सिदार एवं गांव के सरपंच, क्षेत्र के जनपद सदस्य एवं अन्य शिक्षकों की ओर से किया गया।

         सभा की अध्यक्षता कर रहे संकुल प्राचार्य रमेश शर्मा ने शिक्षक कृपाराम प्रधान के सम्मान में कहा कि शिक्षकीय कार्य केवल एक पेशा भर नहीं है, बल्कि यह अपने साथ अनुशासन और जीवन मूल्यों के प्रति समर्पण की मांग करता है। इस पेशे में शिक्षक को आजीवन अनुशासन का पालन करना होता है तभी उसकी विश्वसनीयता समाज में बनती है। शिक्षक बच्चों के भीतर जो निर्माण करता है वह अदृश्य और अमूर्त है इसलिए समाज जल्दी से उसका मूल्यांकन नहीं कर पाता। शिक्षक के कार्य अमूर्त होकर समाज को जीवित रखने के काम आते हैं। तमाम बुराईयों के बाद भी अगर समाज में कुछ अच्छाइयां आज भी बची हैं तो उन अच्छाईयों में एक समर्पित शिक्षक द्वारा किये गए कार्यों का हाथ होता है। भले ही वे अमूर्त रहकर दिखाई न दें पर जीवन मूल्यों के बीज को पीढ़ी दर पीढ़ी बचाए रखने में शिक्षक के योगदान को नज़र अंदाज़ नहीं किया जा सकता। कृपाराम प्रधान जैसे समर्पित शिक्षक के विदाई समारोह में अगर इतनी संख्या में लोग उपस्थित हैं तो आशा और उम्मीद की जानी चाहिए कि आज भी समाज में अनुशासित और समर्पित शिक्षकों के प्रति श्रद्धा और आदर का भाव बचा हुआ है। इस अवसर पर प्रेमचंद की कहानी नमक का दरोगा के संदर्भ में शिक्षकों द्वारा ईमानदारी जैसे जीवन मूल्यों को निर्मित करने में एक शिक्षक की कैसी भूमिका हो सकती है, उस पर भी उन्होंने बातें रखीं।
            अंत में शिक्षक कृपाराम प्रधान ने अपने शिक्षकीय जीवन की यात्रा में जो भी जीवंत अनुभव रहे, जिनका भी उन्हें साथ मिला, उसका विस्तार से उन्होंने वर्णन किया। अंत में ग्रामीणों, छात्र छात्राओं तथा संकुल से आए शिक्षकों द्वारा विदा हो रहे शिक्षक का शाल, श्रीफल, उपहार भेंट से सम्मान किया गया।कार्यक्रम का संचालन व्याख्याता जीएस निषाद और आभार प्रदर्शन जामगांव संकुल के सीएसी रोहित सिदार ने किया।

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