मुफलिसी के दौर में जीने वाला पीड़ित हरिजन परिवार भटक रहा इंसाफ के लिए
रायगढ़ (सृजन न्यूज)। भ्रष्टाचार और घोटालों के जमाने में एक से बढ़कर एक कारनामें देखने व सुनने को मिलते हैं। अब तो आलम यह है कि एक तरफ दूसरों के हक पर डाका डालो और दूसरी तरफ दिखावे के लिए सामाजिक हित में उसी का कुछ हिस्सा खर्च कर वाहवाही लूटो। ऐसा ही एक कुटिल चाल टीआरएन एनर्जी कटाईपाली सी के विद्यालय के विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों तथा अध्यापकों के साथ चल रहा है।
खबर है कि अक्सर विवादों में घिरा रहने वाला नावापारा (टेंडा) के भेंगारी में संचालित टीआरएन एनर्जी ग्राम कटाईपाली सी स्थित विद्यालय के बोर्ड परीक्षा परिणाम के बाद वहाँ के विद्यार्थियों के लिए एक शानदार अभिनंदन समारोह आयोजित करेगा। यही नहीं, विद्यार्थियों के भविष्य की योजनाओं पर भी चर्चा कर उनकी क्षमता और संसाधनों पर भी चिंतन कर राह निकाला जायेगा। यह बातें स्कूल में आयोजित विदाई समारोह के अवसर पर विद्यार्थियों को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि के रूप में वायुनन्दन पांडे विभागाध्यक्ष सुरक्षा एवं प्रशासन टीआरएन एनर्जी भेंगारी ने कहा है। अब सवाल उठता है कि इस कंपनी को जब इतना ही सामाजिक हित में सेवा करने का बुखार चढ़ा है तो आज से सात साल पहले उन गरीब किसानों से खरीदी जमीन, जिसकी तय कीमत की आधी राशि देकर यह कहकर कंपनी के महाप्रबंधक के नाम तत्काल रजिस्ट्री करवा ली कि बाकि राशि प्रमाणीकरण में देंगे, लेकिन आज सात वर्ष बीत जाने के बाद भी बकाया लाखों की राशि क्यों नहीं चुकता कर रहा है?
दरअसल, विवादों से चोली दामन का साथ रखने वाली टीआरएन एनर्जी प्रायवेट लिमिटेड ने रायगढ़ जिले के ग्राम पंचायत गेरवानी के गरीब हरिजन किसान की जमीन प. ह. नं. 27, खसरा – 129/16क /1, रकबा – 0.384 को खरीदने के नाम पर आधे पैसे देकर हड़प लिया है। पीड़ित की माने तो टीआरएन के बड़े अफसर ने हरिजन परिवार की पुश्तैनी जमीन को खरीदते हुए बकायदा रजिस्ट्री भी कराई, लेकिन चेक में कुछ राशि देने के बाद बाकि प्रमाणीकरण के समय देंगे कह कर किसान को भरोसा देते हुए रजिस्ट्री के मूल दस्तावेज भी सौंप दिए और नगद को डकार गया। यही वजह है कि जमीन खरीद-बिक्री की मूल रजिस्ट्री कागजात को बतौर सबूत रखने वाला किसान परिवार आज भी टीआरएन कंपनी से बकाया रकम पाने की आस में बैठा है।
इसी तरह एक और जानकारी के अनुसार घरघोड़ा के अंतर्गत नावापारा(टेंडा) के भेंगारी स्थित टीआरएन एनर्जी प्रायवेट लिमिटेड ने दर्जनों किसानों के साथ धोखाधड़ी की है। एक स्थानीय प्रतिष्ठित दैनिक अखबार में छपी खबर के अनुसार टीआरएन एनर्जी ने विश्वनाथ हेमब्रम पिता ठाकुरा हेमब्रम निवासी कटघोरा सहित अन्य कई लोगों के नाम पर जमीन खरीदी है, वहीं टीआरएन के खिलाफ लगभग 30 आदिवासियों ने आवेदन भी दिया है।
उल्लेखनीय है कि रायगढ़ जिले में ज्यादातर जमीनें आदिवासियों की है जो गैर आदिवासियों के लिए अहस्ताँतरित हैं, परन्तु नीति-नियमों को ताक पर रख कर सैकड़ों हेक्टेयर आदिवासी जमीन कंपनियों द्वारा हड़प ली गयीं और यह सिलसिला अभी भी जारी है। किसानों को विकास का लॉलीपॉप दिखाकर औनेपौने दामों में उनकी जमीनें खरीद ली जाती हैं और उद्योगों की स्थापना कर पूरे क्षेत्र के वातावरण को भयंकर प्रदूषण के आगोश में झोंक देते हैं। ऐसे ही कई गंभीर मामले इस क्षेत्र में आम लोगों के बीच दबी जुबान चर्चा का विषय बने हुए हैं।पीड़ित अज्ञानतावश और आर्थिक रूप से कमजोर होने की वजह से अब तक न्याय पाने से दूर हैं, जोकि गंभीर चिंता की बात है।

टीआरएन द्वारा इस फर्जी तरीके से हुई जमीन खरीदी मामले में तहतक जाकर देखें तो ऐसे और भी किसान धोखाधड़ी के शिकार हुए हैं जो भय या संकोचवश खुलकर सामने नहीं आ पा रहे हैं। फिलहाल इस मामले में हकीकत की तहकीकात में तह तक जाकर वास्तविक तथ्यों की पूरी जानकारी आप तक पहुँचाने के लिए प्रयासरत है। ऐसा नहीं है कि टीआरएन एनर्जी प्रायवेट लिमिटेड कंपनी के खिलाफ यह पहला मामला है, बल्कि धोखाधड़ी के ऐसे कई आरोप लग चुके हैं जिसके चलते कंपनी की मुश्किलें बढ़ गई है। यही कारण है कि टीआरएन एनर्जी अब लोगों को रिझाने की नाकाम कोशिश कर रहा है। खैर, सच्चाई जो भी हो लेकिन हम अपनी नैतिक जिम्मेदारी पूरी करने के लिए टीआरएन की चाल, चेहरा और चरित्र की वास्तविक सच्चाई से अपने सुधि पाठकों को अवगत कराते रहेंगे। अगली खबर में हम इस मामले की तह तक जाकर उस अधिकारी का नाम भी प्रमुखता से उजागर करेंगे, जिसने हरिजन किसान परिवार को ठगी का शिकार बनाया, ताकि लोग भी असलियत से रूबरू हो सके।
