छात्र विरोधी विश्वविद्यालय के खिलाफ अभाविप करेगी आंदोलन – सौरभ

by SUNIL NAMDEO
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रायगढ़। अभाविप के जिला सह संयोजक सौरभ नामदेव ने बताया कि रायगढ़ विश्वविद्यालय अपने स्थापना के बाद ही से विवादों से घिरा है। कभी परीक्षा के लिए तो कभी परिणाम के लिए। आज विश्वविद्यालय स्थापना को 2 वर्ष से ज्यादा हो चुके है पर अभी भी विश्वविद्यालय की कार्य प्रणाली हमारे समझ से बाहर है। लगातार विश्विद्यालय छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है तो लगातार विश्वविद्यालय के परीक्षा परिणाम भी खराब आ रहे हैं। वहीं, सुविधा के नाम पर भी छात्रों को कुछ नहीं मिलता। जब छात्र अपनी समस्याओं को लेकर कॉलेज जाते हैं तो वहां से उन्हें विश्विद्यालय भगा दिया जाता है।

                   

छात्र नेता का आरोप है कि विश्वविद्यालय जाने पर वहां उनकी कोई सुनने वाला ही नहीं होता। 100-150 किलोमीटर दूर से विद्यार्थी अपनी समस्याओं को लेकर विश्वविद्यालय पहुंचते हैं पर उनकी कोई सुनवाई नहीं होटी। सभी छात्र अब विश्वविद्यालय के रवैये से परेशान होकर त्रस्त हो चुके हैं। अब विश्वविद्यालय ने नया कारनामा कर डाला है। हाल ही में जनवरी- फरवरी में सेमेस्टर पद्धति से पढ़ाई करने वाले छात्रों की परीक्षाएं हुई थी। अब बमुश्किल  2 महीने बाद ही 23 अप्रैल को विश्वविद्यालय ने नई समय सारणी जारी कर दी है, जिसमे 29 मई से परीक्षा शुरू हो रही है।

                                  सौरभ का यह भी कहना है कि आमतौर पर यह परीक्षा जुलाई के अंतिम सप्ताह में हुआ करती है। अभी छात्रों के कोर्स भी कम्पलीट नहीं हुए है और न ही दिए हुए परीक्षा दिनांक तक हो पाएंगे। ऐसे में विश्वविद्यालय का समय से पहले ही समय सारणी जारी करते हुए परीक्षा का आयोजन करना छात्रों के प्रति संवेदनहीन होने के साथ  उसकी कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिन्ह भी लगाता है। रायगढ विश्विद्यालय में पढ़ाई करने वाला छात्र यह जानना चाहता है कि क्यों आखिर विश्वविद्यालय लगातर स्टूडेंट्स के विपरीत जा कर ऐसे फैसले ले रही है। अभी कुछ दिन पहले ही ATKT वाले विद्यार्थियों को रीचेकिंग से वंचित रखा गया था। कुछ दिन पहले ATKT डिग्री कॉलेज के विद्यार्थियों के इंटरनल एग्जाम का नम्बर देना ही छोड़ दिया गया था। अब समय से पहले ही परीक्षा का आयोजन किया जा रहा। कुल मिलाकर सारे प्रकरणों में नुकसान स्टूडेंट्स का ही होना है।विश्वविद्यालय छात्रो के भविष्य के साथ खेलना बंद करते हुए अपने कार्यप्रणाली में आवश्यक बदलाव जल्द से जल्द करे ताकि स्टूडेंट्स को परेशानी न उठानी पड़ी अन्यथा अभाविप को मजबूरन आंदोलन का ही रास्ता अख्तियार करना पड़ेगा।

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