अडानी ने विकास की गंगा बहाने के नाम पर प्रभावितों को ठगा

by SUNIL NAMDEO
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पूर्व विधानसभा प्रत्याशी मनीषा गोंड ग्रामीणों के साथ मुखालफत पर उतरीं

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। जिले में उद्योग विस्तार दैनिक रोजमर्रा का रूप ले चुकी है जो पर्यावरण प्रदूषण पर सबसे ज्यादा प्रभाव डाल रही है। इसी क्रम में पुसौर ब्लॉक के टेंडा सूपा – भंडार क्षेत्र में स्थित अडानी पावर की जन सुनवाई 12 जुलाई को प्रस्तावित है जो पूरी तरह अवैधानिक है।

                    यह आरोप लगाते हुए पूर्व विधानसभा प्रत्याशी एवं आदिवासी नेत्री मनीषा गोंड ने कहा कि यदि इस तरह उद्योग विस्तार होता रहा तो प्रदूषण की मार से कराह रहे नागरिकों का रायगढ़ में सांस लेना भी मुश्किल हो जायेगा। अडानी प्लांट में पहले से पावर यूनिट होने के बावजूद पुनः 600 MW का विस्तार करने से और अधिक प्रदूषण बढ़ेगा, साथ ही इससे निकलने वाले वाष्प कैमिकल से श्वांस वायु जहरीले हो जायेंगे, जिसका प्रभाव जीव – जंतु सहित मानव जीवन पर भी पड़ेगा।

               यही नहीं, प्लांट विस्तार से स्थानीय लोगों का भला किया जाना केवल कागजों पर ही सीमित है। जबकि, क्षेत्र के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग कर यहीं के लोगों को ठगा जा रहा है। यह प्लांट महानदी के किनारे स्थित है, जो पहले से ही प्रदूषण की मार झेल रही है। ग्रामीणों का कहना है कि इस विस्तार से नदी के जल का अधिक उद्योग उपयोग से जल संकट बढ़ेगा। इससे दर्जनों गांव में जल स्तर में भी कमी आयेगी जो चिंतनीय है। जिस प्रकार से रायगढ़ जिले में प्लांटों के विस्तार के लिए जनसुनवाई किया जा रहा है वह लोगों के जीवन में जहर घोलने से कम नहीं है।

                आरोप है कि जिस प्रकार लगातार जनसुनवाई हो रही है वह आने वाले समय में रायगढ़ वासियो के सामाजिक और प्राकृतिक जीवन पर काफी प्रतिकूल प्रभाव डालेगा। दिनोदिन वातावरण का तापमान 48 डिग्री के पार होने से आम आदमी का जीना मुश्किल होते जा रहा है। वो दिन दूर नहीं जब प्रकृति का तापमान को 50 डिग्री से ऊपर जायेगा। प्लांटों के द्वारा SIA रिपोर्ट का भी पालन नहीं किया जाता है। झूठी SIA रिपोर्ट बनाते हुए जनसुनवाई को सफल करा लिया जाता है।

             मनीषा गोंड की मानें तो बड़े भण्डार, छोटे भण्डार, सरवानी और अमलीभौना के बीच स्थित अडानी पावर के जनसुनवाई में कई गांवों के विरोध करते हुए अपनी आवाज बुलंद करेंगे। हालांकि, कुछ दलालनुमा लोग प्रबंधन से मोटी रकम लेकर ग्रामीणों को बहकाने की कोशिश कर रहे हैं। ये दलाल विरोध को कमजोर करने के लिए साम, दाम, दण्ड, भेद की नीति अपनाने पर भी आमादा हैं और लोगों के ईमान की खरीद-फरोख्त में लगे हैं, परंतु उनके मंसूबे को कामयाब होने नही देंगे और ग्रामीणों के साथ मिलकर इस लड़ाई को आंदोलन का रूप देने में कोई कसर नहीं छोड़ेंगे।

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