साधारण कृषक परिवार की साहसी महिला बनीं नारी शक्ति की मिसाल

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। गेमकेला गाँव की प्रगतिशील किसान गायत्री पैंकरा (35 वर्ष) को उनकी बहुफसली खेती, मिट्टी संरक्षण तकनीक और टिकाऊ कृषि मॉडल के लिए वर्ष 2025 का “फसल विविधीकरण चैंपियन अवॉर्ड” प्रदान किया गया है। अपने 3 एकड़ के आम बागान को केंद्र में रखकर विकसित एकीकृत खेती मॉडल ने उन्हें पूरे जिले में विशिष्ट पहचान दिलाई है।
प्रदान और सरकारी सन्स्थ सहयोग से विकसित वाड़ी
गायत्री पैंकरा की खेती का महत्वपूर्ण आधार उनकी विकसित की गई वाड़ी प्रणाली और फसल विविधिकरण जैविक खेती है जो वाड़ी प्रोजेक्ट अंतर्गत नाबार्ड के आर्थिक सहयोग के तेहत प्रदान संस्था द्वारा कार्यकारी सन 2024 में किया गया था । वर्ष 2022-23, मनरेगा के सहयोग से वाड़ी विकास कार्य अंतर्गत सहयोग मिला था। पौधरोपण, भूमि सुधार, मिट्टी संरक्षण और जैविक फसल विविधिकरण सफलतापूर्वक पूरे किए गए। इससे उनकी खेती की गुणवत्ता और उत्पादकता में बड़ा सुधार हुआ। उन्होंने खरीफ, रबी और ज़ायद तीनों मौसमों में विविध फसलें उगाकर लगभग ₹3.4 लाख वार्षिक आय प्राप्त की है। इसमें खरीफ की धान, मूंगफली, उड़द (आय ₹2.15 लाख), रबी की आलू, मटर, फूलगोभी, पत्तेदार सब्जियाँ (आय ₹75,000) और ज़ायद की लोबिया, भिंडी, उड़द (आय ₹50,000) है।
गायत्री पैंकरा अपने खेत पर नियमित रूप से फील्ड विजिट और प्रशिक्षण प्रदान संस्था के सहयोग से आयोजित कर अन्य किसानों को प्रेरित कर रही हैं। बागवानी विभाग ने उनके खेत को डेमोंस्ट्रेशन प्लॉट घोषित किया है। प्रधान संस्था द्वारा नामांकन व सत्यापन किया गया। डीडीएम एम. बारा और आरएईओ सुश्री कविता पैंकरा ने उनके मॉडल की सराहना की है। कुल मिलाकर कहें तो प्रदान, नाबार्ड, उद्यानिकी और मनरेगा के सहयोग से समर्थित वाड़ी मॉडल और वैज्ञानिक बहुफसली खेती के जरिए गायत्री पैंकरा टिकाऊ कृषि का प्रेरक उदाहरण भारत में बन चुकी हैं।




