बरौद के बाशिंदों की खरी-खरी : एसईसीएल से नहीं मिला विस्थापन का लाभ तो करेंगे बेमियादी हड़ताल

by SUNIL NAMDEO
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कुसमुंडा, गेवरा और दीपिका की तरह मांगा विस्थापन का लाभ, एसईसीएल प्रबंधन ने नियमानुसार लाभ देने का दिया भरोसा

बरौद कालरी/रायगढ़ (सृजन न्यूज़)। ग्राम बरौद के विस्थापन पर पिछले दिनों एसईसीएल, राज्य सरकार एवं ग्रामीणों के बीच आयोजित त्रिपक्षीय वार्ता किसी सार्थक नतीजे तक नही पहुंच सकी। ग्रामीणों ने दो टूक में कहा कि अन्य जगह की तरह उन्हें 10 लाख रुपये की दर से विस्थापन का लाभ दिया जाए, अन्यथा वे हड़ताल पर जाएंगे।

                               उल्लेखनीय है कि ग्राम बरौद में प्रचुर मात्रा में कोयला का भंडार होने से उसके विस्थापन की प्रक्रिया चल रही है। बैठक में ग्रामीणों ने कहा कि 6 जुलाई 2023 की हड़ताल के पश्चात महाप्रबंधक रायगढ़ क्षेत्र के साथ 10 जनवरी 2024 को ग्राम बरौद में सम्पन्न चर्चा के अनुसार कुसमुंडा, गेवरा एवं दीपिका की तरह 8 लाख रुपये प्रति घर के हिसाब से विस्थापन का लाभ दिया जाए। उन्हें किसी भी स्थिति में 3 लाख रुपये की दर से विस्थापन मंजूर नही है। प्रबंधन के द्वारा इस दिशा में कार्यवाही आगे नहीं बढ़ाये जाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए ग्रामीणों ने दो टूक कहा कि विस्थापन की पूरी राशि मिलने के बाद ही वे जमीन खाली करेंगे।

      उन्होंने दफाई पारा के भूमिहीन निवासियों के पुनर्विस्थापन के लिए 8 से 10 लाख रूपये दिए जाने की मांग की। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि गाँव विस्थापित होने तक उन्हें मूलभूत सुविधाये दी जाए। इसी तरह निर्भय झरिया ने मांग की कि उनका पुत्र लीलाधर झरिया भू-अर्जन के एवज में कुसमुंडा क्षेत्र में कार्यरत था। दृर्घटना में लीलाधर की मृत्यु हो जाने से उसकी जगह प्रेमसागर झरिया पिता निर्भय झरिया को अनुकंपा नियुक्ति पर तत्काल बहाल किया जाय। उन्होंने नरिहर दास के पुत्र को भू-अर्जन के एवज में रोजगार स्वीकृति का प्रकरण एसईसीएल मुख्यालय में प्रोसेस में है। उसकी पदस्थापना रायगढ़ क्षेत्र में की जाए और भरण-पोषण के लिये बेरोजगार ग्रामीणों को वैकल्पिक रोजगार उपलब्ध कराया जाए। क्षुब्ध ग्रामीणों साफ- साफ कहा कि शीघ्र ही उनकी मांगें नहीं मानी जाती है तो बरौद के ग्रामीण पैदल चलकर तहसीलदार कार्यालय, कलेक्टर कार्यालय एवं एसईसीएल के सभी कार्यालयों (एसईसीएल, मुख्यालय बिलासपुर) का घेराव/धरना प्रर्दशन करने जा रहे है।

         इधर, एसईसीएल प्रबंधन ने ग्रामीणों से कहा कि एसईसीएल एक सम्मानित सरकारी संस्था है, जिसमें किसी तरह से छल-कपट अथवा गुमराह करके अपना काम नही साधा जाता , उसके लिए सामुदायिक विकास एवं राष्ट्रहित सर्वोपरि है। प्रबंधन ने कहा कि नियम के मुताबिक ग्राम वासी एवं प्रभावित व्यक्तियों को विहित सुविधाएँ दी जाती है। राज्य शासन के प्रतिनिधि नायब तहसीलदार विकास जिंदल ने ग्रामीणों को बताया कि एसईसीएल ही एक ऐसी कम्पनी है, जो अन्य कम्पनियों की तुलना में सामाजिक दायित्व, यथा नौकरी एवं अन्य जरूरी सुविधाएं प्रदान करती है।

                      त्रिपक्षीय वार्ता में ग्रामीणों की ओर से अतिशीघ्र मांगें मानने का आग्रह किया गया। बैठक सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुई, जिसमें एसईसीएल की ओर से उप क्षेत्रीय प्रबंधक अरविंद कुमार राय ,कार्मिक प्रबंधक ओंकार सिंह, उप प्रबंधक खनन शुभम थवाईत तथा राज्य सरकार की ओर से नायब तहसीलदार विकास जिंदल एवं ग्रामीणों के साथ सरपंच श्रीमति रथमिला सनत कुमार राठिया शामिल हुए।

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