अजब-गजब : उद्योगों के लिए 1 रुपए लीटर में प्राकृतिक नालों और पहाड़ों का पानी और जनता के लिए 15 रुपए में बाजार में बोतल का पानी

by SUNIL NAMDEO
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रायगढ़ बचाओ लड़ेंगे रायगढ़ ने जनहित में खोला मोर्चा

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। केलो नदी के उन्नयन और प्रदूषण मुक्त होने के लिए रायगढ़ जिले की जनता सदैव प्रार्थनारत और प्रयासरत है पर जब सिंचाई विभाग के अधिकारी इसका दोहन अपने निजी स्वार्थ के लिए करेंगे तो जनता किससे फरियाद करेगी।
          रायगढ़ बचाओ लड़ेंगे रायगढ़ ने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को पत्र भेज कर आग्रह किया कि केलो नदी इस जिले की पूजनीय और साथ ही जीवनदायनी है। इसका प्रभाव पूरे अंचल में है। केलो नदी के प्रवाह में अनेक प्राकृतिक नालों, छोटी-छोटी बरसाती नदियों, तालाबों और पहाड़ों का भी प्राकृतिक पानी बह कर सालभर मिलती है जिससे इसका जल प्राकृतिक रूप से जीवनीय है। जिस पर जनता की कई दशकों से मांग पर इसमें जलाशय (डैम) बनाया गया, इसके पानी का मुख्य उपयोग में जिले के जलस्तर को बढ़ाना, किसानों को खेतों में नहर के माध्यम से पानी उपलब्ध करवाना, निस्तार के लिए जल और आम जनता के पेयजल उपलब्ध कराना ही था जो कि जनहित था। इसमें तत्कालीन सिंचाई विभाग में पदस्थ कार्यपालन अभियंता एसके गुप्ता ने अपने कार्यकाल में प्राकृतिक रूप से पानी का प्रवाह केलो नदी में समहित होने वाले नाले के पानी को उद्योगों को आबंटित कर अनुबंध कर लिया। गौरतलब है कि आज के समय में प्राकृतिक पानी जिसकी आवश्यकता रायगढ़ जिले की जनता को पीने के पानी शुद्ध पेयजल, खेतों के फसल, जमीनों का जलस्तर बढ़ाने काम के लिए सुरक्षित रखे रखने की प्रस्तावना के रूप में केलो डैम के निर्माण में स्पष्ट है। इसके तहत भारत सरकार के जलसंसाधन विभाग ने मंजूरी भी दी है।
रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़ ने शिकायत पत्र में कलेक्टर से आग्रह किया कि त्वरित जांच करवाकर उक्त प्राकृतिक जल जो कि केलो नदी में समहित होना था जिसे तत्कालीन सिंचाई विभाग के कार्यपालन अभियंता एसके गुप्ता द्वारा निजी स्वार्थ के तहत मेंसर्स सिंघल एनर्जी, तराईमाल और मेंसर्स श्याम इस्पात, तराईमाल दोनों को गेरवानी नाला का प्राकृतिक पानी देने का 1 ₹ लीटर में देने का अनुबंध बेहिचक कर लिया। इसकी वास्तविकता आम जनता के साथ कलेक्टर रायगढ़, प्रदेश के सिंचाई विभाग और केलो परियोजना विभाग से छिपाई गई की उक्त पानी पर केलो नदी के डैम के तहत केलो परियोजना का है। इसके लिए रायगढ़ बचाओ – लड़ेंगे रायगढ़ ने कलेक्टर से जांच करवाने के लिए समिति बना कर जांच करवाने की मांग की की। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत रायगढ़, कार्यपालन अभियंता केलो परियोजना रायगढ़, प्राचार्य शासकीय पॉलिटेक्निक,रायगढ़, प्राचार्य इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय रायगढ़, कार्यपालन अभियंता पीएचई रायगढ़ और वरिष्ठ अधिकारी जिला प्रशासन रायगढ़ के अधिकारियों की समिति बनाकर इसकी जांच गंभीरता से करवाते हुए जल आबंटन के अनुबंध को त्वरित जनहित में रद्द करने के आदेश के अनुशंसा प्रदेश शासन को प्रेषित करें।
रायगढ़ बचाओ लड़ेंगे रायगढ़ के विनय शुक्ला, मनीष अग्रवाल, अभिषेक चौहान, परेश माइति, प्रीति केरकेट्टा, ईनाम सिद्दीकी, आशुतोष शुक्ला, ऋषभ मिश्रा, आकाश श्रीवास, सुरेन्द्र पटेल, आदर्श श्रीवास, सानू माइति, शिवम कछवाहा, अनूप शर्मा, सानू सोनी, सूरज यादव, प्रदीप सिंह, अमन तलरेजा, अनिल चीकू ने बताया कि तत्कालीन कार्यपालन अभियंता एसके गुप्ता के द्वारा अपने स्वार्थ के तहत उद्योगों का पानी देकर रायगढ़ जिले की जनता के हक का प्राकृतिक पानी 1रुपए लीटर में उद्योगों से अनुबंधित किया, जबकि जनता अपने स्वास्थ्य के तहत बाजार से 15 रुपए लीटर में बोतल का पानी पीकर जीवन यापन कर रही है। पीएचई और नगर निगम के द्वारा उपलब्ध पेयजल अनेकों केमिकल से शुद्ध कर उपलब्ध करवाया जाता है, जबकि प्राकृतिक जल की हकदार जिले की जनता है, पर सिंचाई विभाग के गुप्ता ने प्राकृतिक पानी का मलिक उद्योगों को बनाकर आम जनता के लिए औद्योगिक अपशिष्ट से परिपूर्ण पानी जनता के उपयोग के लिए बना दिया है।

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