कृष्ण और सुदामा की अनन्य मित्रता को देख श्रद्धालु हुए भाव विभोर

by SUNIL NAMDEO
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कोरबा/रायगढ़ (सृजन न्यूज़)। कोरबा के शिवाजी नगर में चल रहे श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह का सातवां दिवस भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा के मित्रता के नाम रहा। कथावाचक पंडित प्रकाश शर्मा ने कृष्ण-सुदामा चरित्र की इतनी मार्मिक व्याख्या की कि श्रद्धालु भाव विभोर हो गए।

            ऊर्जा नगरी कहे जाने वाले कोरबा के शिवाजी नगर स्थित एलआईजी 50 निवासी आईटीआई के रिटायर्ड एकाउंटेंट नंदकिशोर नामदेव और श्रीमती तुलसी नामदेव के पुत्र सुमित नामदेव की आठवीं पुण्यतिथि पर मोक्ष प्राप्ति के लिए गत 26 दिसंबर 2024 से आयोजित संगीतमय भागवत कथा के सातवें दिन व्यासपीठ पर आसीन पं. प्रकाश शर्मा ने द्वारिका लीला, राजसूय यज्ञ और सुदामा चरित्र से जुड़ी सच्चाई को विस्तार से बताया।

      कथावाचक पंडित प्रकाश शर्मा ने धर्म का मर्म समझाते हुए कहा कि भगवान श्रीकॄष्ण भले ही सांदीपनि आश्रम से शिक्षा-दीक्षा लेने के पश्चात द्वारिकाधीश बन गए, परन्तु सच्ची मित्रता की असल परिभाषा को नहीं भूले। देवकी नंदन कृष्ण के महल पहुंचे गरीब ब्राम्हण सुदामा को रंचमात्र भी विश्वास नहीं था कि द्वारिका के महाराजा अपने बालसखा को पहचानेंगे। द्वारपालों के रोके जाने के बावजूद जब कृष्ण को पता चला कि सुदामा उनके दरवाजे पर याचक की भांति खड़े हैं तो वे खाली पांव दौड़कर अपने मित्र के पास पहुंचे और पूरे सम्मान के साथ महल के भीतर ले जाकर न केवल मित्रता धर्म निभाया, अपितु सुदामा को रंक से राजा तक बना दिया।

     कृष्ण की भक्ति से लेकर सुदामा से मित्रता के छिड़े प्रसंग को सुनकर जहां श्रद्धालु भाव विभोर हुए बिना नहीं रह सके। उसी तरह कृष्ण के वेश में दीपांशु नामदेव और सुदामा के चरित्र चित्रण में विष्णु पाटकर ने अपने अभिनय से खूब वाहवाही लूटी। भागवत कथा के  आठवें दिवस श्रीकॄष्ण और उद्धव संवाद, परीक्षित मोक्ष कथा, विश्रांति तथा चढ़ोतरी की परंपरा का निर्वाह होगा।

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