जमीन संबंधी विवादों के लिए पृथक दस्ते की उठी मांग

by SUNIL NAMDEO
0 comment
img-20260221-wa01799122518692518146593.jpg
previous arrow
next arrow

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं आम नागरिकों ने प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मांग की है कि प्रदेश में भूमि विवादों के बढ़ते प्रकरणों में फंसकर कई सीधे-साधे लोग अपने हक भूमि से हाथ धो रहे हैं। ऐसे प्रकरणों की सुनवाई और उसमें पुलिस की दखल रहने के उद्देश्य से राजस्व एवं पुलिस दोनों विभागों के नुमाइंदों की एक पृथक सेल प्रत्येक जिले में गठित की जानी चाहिए ताकि भूमि संबंधी मामलों की सुनवाई हो और दोषी व्यक्तियों पर कड़ी से कड़ी कार्यवाही की जावे।
                                 रायगढ़ के सामाजिक कार्यकर्ता हीरा मोटवानी ने कहा कि यदि इस प्रकार की कोई स्पेशल सेल गठित होती है तो अतिक्रमणकारियों एवं गुंडागर्दी करने वालों पर लगाम कसी जा सकती है। नागरिकों ने उच्चतम न्यायालय के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाई कोर्ट की अवधारणा है कि जिस व्यक्ति के पास जमीन का टाइटल होगा यदि उसकी भूमि पर कोई व्यक्ति छल या दुर्भावनापूर्ण तरीके से कब्जा कर लेता है तो उसे बलपूर्वक हटाया जाना चाहिए। न्यायालय ने कहा है कि ऐसे में कब्ज़ा कितना भी पुराना हो उसके टाइटिल की शुद्धता पर विशेष ध्यान देना है ।
नगर के प्रबुद्ध नागरिक सुरेश अग्रवाल, संतोष राय, विनोद कपूर, वरिष्ठ अधिवक्ता सुधांशु गुरु, करतार सिंघ कालरा, बजरंग अग्रवाल, राजेंद्र अग्रवाल, राकेश पटेल, उमाशंकर पटेल, जय अग्रवाल ने उपमुख्यमंत्री द्वय अरुण साव, विजय शर्मा तथा वित्त मंत्री ओपी चौधरी से निवेदन किया है कि जब छत्तीसगढ़ में बीजेपी की सरकार थी तो पूर्व मंत्री ननकी राम कंवर की पहल पर इस प्रकार की सेल गठित की गई थी, जिससे लोगों को काफी सुविधा महसूस हुई थी और उन्हें न्याय भी मिला था। फिर,  बाद में उन्हें क्यों बंद कर दिया गया यह समझ से परे है। अतः वे इस मुद्दे को उचित फोरम में उठाकर लोगों को राहत पहुंचाने की पहल करें तथा मध्य छत्तीसगढ़ भू राजस्व संहिता में आवश्यक संशोधन किया जावे कि यदि किसी निजी भूमि पर कोई व्यक्ति अतिक्रमण कर रहा है तो उस पर नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही होनी चाहिए।
    आज जब अतिक्रमण एवं छल व बलपूर्वक निजी जमीनों पर कब्जे हो रहे हैं तब ऐसे स्पेशल सेल की नितांत आवश्यकता है। इस तरह न केवल स्वार्थी तत्वों पर काबू पाया जा सकेगा, बल्कि भ्रष्टाचार पर भी अंकुश लगेगा और स्पेशल सेल के द्वारा विवेचना में यदि राजस्व अधिकारियों की मिलीभगत से राजस्व अभिलेखों में कूट रचना पर पाई जाती है तो सम्बंधित पक्षकार के साथ इन कर्मचारियों पर भी एफआईआर दर्ज होनी चाहिये। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी नागरिकों ने पंजीयन के साथ ही नामांतरण की मांग उठाई थी जिस राज्य शासन ने संज्ञान में लेते हुए इसे लागू कर लिया है जिसके लिए नागरिकों ने राज्य शासन के प्रति आभार व्यक्त किया है।

You may also like

Leave a Comment