जसगीत एलबम “मुमफली, उखरा अउ लाई राखे हावं बूढ़ी माई” में रायगढ़ के कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा

by SUNIL NAMDEO
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धूम मचा रही है चैत्र नवरात्रि पर बूढ़ी माई को समर्पित नया जसगीत

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। चैत्र नवरात्रि के पावन अवसर पर जहाँ सम्पूर्ण जगत भक्ति के सागर में डूबकर आदि शक्ति माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना व स्तुति में लगा है, वहीं माता रानी की कृपा पाने भक्तगण श्रद्धानुसार विभिन्न प्रकार से माता सेवा में लगे हुए हैं। कोई 9 दिन उपवास रखकर तो कोई मौनव्रत धारण किया हुआ है। किसी ने मंदिर में मनोकामना ज्योत जला रखा है तो कोई भंडारा अर्पित कर रहा है। इसी तारतम्य में रायगढ़ के कलाकारों ने मातारानी की सेवा में सुन्दर वीडियो एल्बम “मुमफली उखरा अउ लाई, राखे हावं बूढ़ी माई” प्रस्तुत कर अपने अभिनय क्षमता का शानदार प्रदर्शन किया है।
             एई प्रोडक्शन के बैनर तले बने इस पूरे गीत को रायगढ़ की नगर देवी कहे जाने वाली बूढ़ी माई मंदिर एवं नवनिर्मित राधा कृष्ण मंदिर परिसर में फिल्माया गया है। इसके निर्माता संजय अग्रवाल एवं आकाश अग्रवाल हैं। इस भाव-भक्ति पूर्ण गीत में डायरेक्टर राजेंद्र तिवारी ने स्वयं मुख्य कलाकार की भूमिका निभायी है। गीतकार ऋषिकेश यादव के छत्तीसगढ़ी में लिखे गीत को सिंगर कुमार गब्बर ने अपना मधुर स्वर देकर इस जसगीत को कर्णप्रिय बनाया है, वहीं संगीतकार कुना दादा का म्यूजिक अरेंजमेंट प्रशंसा के योग्य है।
                कोरियोग्राफर पीताम्बर साहू ने नृत्य संयोजन में काफी मेहनत की है जो कि दर्शकों को मुग्ध कर रही है। कुल मिलाकर नवरात्रि के अवसर पर प्रस्तुत यह जसगीत देखने योग्य है। स्थानीय कलाकारों ने इसे लोकप्रिय बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है। इस एल्बम को खूबसूरती देने में छायाकार घनश्याम आदित्य, मेकअप एन्ड हेयर इंदु तिवारी, वीडियो प्रोडक्शन चिंटू शहरी, लक्की श्रीवास, विवेकानंद प्रधान, को-आर्टिस्ट खुशी, सुष्मिता, खुशबु, रूचि, प्राची दीप्ती, ऋतु, आरती, दिव्या तथा एडिटिंग एन्ड पोस्टर डिजाइनिंग अदिति स्टूडियो रायगढ़ का सराहनीय योगदान रहा।
           बात करें तहतक की तो आधुनिक फैशन और चकाचौंध की दुनिया में मशहूर हस्तियों को ही महत्व दिया जाता है। उभरते हुए स्थानीय कलाकारों को कोई ध्यान नहीं देते। यही वजह है कि स्थानीय कलाकार चाहे किसी भी क्षेत्र से हों, बड़े मंचों में उपेक्षा के शिकार होते आये हैं। प्रतिभाएँ हर जगह मौजूद हैं।  जरुरत है उन्हें मौका देने की, उन्हें प्रोत्साहित करने की, ताकि वे अपनी कला का बेहतर प्रदर्शन कर सकें।

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