घरघोड़ा कांग्रेस अध्यक्ष शिव शर्मा को कारण बताओ नोटिस जारी

by SUNIL NAMDEO
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घरघोड़ा/रायगढ़ (सृजन न्यूज़)। जिला कांग्रेस कमेटी रायगढ़ (ग्रामीण) द्वारा प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के निर्देश पर घरघोड़ा ब्लॉक अध्यक्ष शिव शर्मा को जारी कारण बताओ नोटिस ने संगठन के भीतर लंबे समय से चल रही नाराजगी को खुलकर सामने ला दिया है। नोटिस में उल्लेख किया गया है कि प्रदेश कांग्रेस के “हाथ से हाथ जोड़ो अभियान” के तहत 22 मार्च 2026 को ब्लॉक स्तर पर कार्यक्रम आयोजित नहीं किया गया, साथ ही घरघोड़ा के वार्ड क्रमांक 7 में आयोजित जिला स्तरीय कार्यक्रम में भी उनकी उपस्थिति और सहयोग का अभाव रहा। इसे अनुशासनहीनता मानते हुए 3 दिनों के भीतर स्पष्टीकरण मांगा गया है। जबकि इस कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज स्वयं उपस्थित थे।

नोटिस के बाद अब यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या यह केवल एक दिन की चूक है या लंबे समय से चली आ रही निष्क्रिय कार्यशैली का परिणाम। कार्यकर्ताओं के बीच चर्चा है कि कई बार पार्टी कार्यक्रम या तो होते ही नहीं और जब होते हैं तो उनमें गिनती के 5–8 लोग ही नजर आते हैं, क्या यही किसी ब्लॉक संगठन की सक्रियता मानी जाए। इस बीच यह भी चर्चाओं में है कि नोटिस मिलने के बाद शिव शर्मा द्वारा संगठन के समक्ष स्पष्ट जवाब देने के बजाय स्थानीय स्तर पर बचाव की कोशिशें शुरू कर दी गईं, क्या यह जिम्मेदारी से बचने का संकेत माना जाए।

स्थानीय कार्यकर्ताओं में नाराजगी इस कदर बढ़ चुकी है कि अब खुलकर यह सवाल उठ रहा है कि क्या वर्तमान नेतृत्व के कारण नए कार्यकर्ता कांग्रेस से जुड़ ही नहीं पा रहे, क्या संगठन का दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार इस पूरी स्थिति को प्रदेश स्तर पर भी संज्ञान में लिया गया है। बताया जा रहा है कि प्रदेश नेतृत्व द्वारा क्षेत्रीय गतिविधियों का अवलोकन करने के बाद ही जिला स्तर पर सख्ती के संकेत दिए गए?

पूर्व में भी कई मामलों और आरोपों से घिरे रहे?

यह पहला अवसर नहीं माना जा रहा जब शिव शर्मा को लेकर संगठन के भीतर सवाल उठे हो। पूर्व में भी उनकी कार्यशैली को लेकर असंतोष की स्थिति बनती रही। कई बार कार्यकर्ताओं ने नेतृत्व में पारदर्शिता और सक्रियता की कमी को लेकर आवाज उठाई, लेकिन हालात में ठोस सुधार देखने को नहीं मिला।

जमीन कब्जे के आरोप भी चर्चा में ?

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि पूर्व में शिव शर्मा के नाम से जुड़े कुछ मामलों में जमीन से संबंधित विवाद या कब्जे के आरोप सामने आए थे। हालांकि इन मामलों को लेकर आधिकारिक स्थिति स्पष्ट नहीं हो पाई, लेकिन क्षेत्र में इस प्रकार की चर्चाएं समय-समय पर उठती रही हैं। क्या इन आरोपों की कभी निष्पक्ष जांच हुई या फिर ये मामले केवल चर्चाओं तक ही सीमित रह गए।

नपं चुनाव में लगातार हार का भी सवाल ?

यह भी चर्चा में है कि शिव शर्मा के नेतृत्व में नगर पंचायत चुनावों में कांग्रेस को लगातार दो बार हार का सामना करना पड़ा, क्या इन परिणामों की जिम्मेदारी तय की गई या फिर इन्हें सामान्य मानकर नजरअंदाज कर दिया गया।

हर चुनाव में गिरता प्रदर्शन, क्या नेतृत्व जिम्मेदार ?

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि लोकसभा, विधानसभा, जनपद और नगर पंचायत जैसे चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन लगातार कमजोर क्यों रहा, क्या इसके पीछे केवल हालात जिम्मेदार हैं, या नेतृत्व की भूमिका पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है।

बार-बार इस्तीफे की चर्चा, लेकिन पद नहीं छोड़ने पर सवाल ?

संगठन के भीतर यह भी एक बड़ा विषय बना हुआ है कि समय-समय पर यह चर्चा उठती रही कि शिव शर्मा द्वारा कभी विधायक स्तर तो कभी स्थानीय स्तर पर इस्तीफे की बात या दबाव की स्थिति बनाई जाती रही। हटाने की बातें भी सामने आईं, लेकिन वास्तविकता में पद से हटने की स्थिति कभी स्पष्ट नहीं हुई।बक्या यह केवल चर्चा भर रही, या फिर इसे एक तरह की रणनीति के रूप में देखा जाए। यही कारण है कि यह मुद्दा अब संगठन के भीतर हंसी और सवाल दोनों का विषय बनता नजर आ रहा है।

स्थिति गंभीर, संगठन के सामने बड़ा सवाल?

मौजूदा हालात को देखते हुए यह मामला अब केवल एक नोटिस तक सीमित नहीं माना जा रहा। यह पूरे संगठन की कार्यप्रणाली, नेतृत्व की विश्वसनीयता और भविष्य की दिशा पर बड़ा सवाल बन चुका है। अब नजर इस बात पर है कि शिव शर्मा इस नोटिस का क्या जवाब देते हैं और क्या संगठन इस बढ़ते असंतोष के बीच कोई ठोस निर्णय लेता है, या फिर मामला केवल चर्चा तक ही सीमित रह जाता है।

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