सावधान : अब बोर खनन हुआ तो खैर नहीं, लगा प्रतिबंध

by SUNIL NAMDEO
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1 अप्रैल से 31 जुलाई तक रायगढ़ जिला जलाभाव क्षेत्र घोषित हुआ

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी मयंक चतुर्वेदी द्वारा छत्तीसगढ़ पेयजल परिरक्षण अधिनियम 1986 (क्रमांक 3, 1987) की धारा 3 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए आगामी ग्रीष्म ऋतु में पेयजल उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संपूर्ण रायगढ़ जिले को 1 अप्रैल से 31 जुलाई 2026 तक जलाभाव ग्रस्त क्षेत्र घोषित किया गया है।
आदेश के अनुसार अधिनियम की धारा 6 के तहत जिले में सक्षम अधिकारी की पूर्व अनुमति के बिना कोई भी नया नलकूप, पेयजल अथवा पेयजल के अलावा किसी अन्य प्रयोजन हेतु खनन नहीं किया जा सकेगा। हालांकि, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग सहित शासकीय एजेंसियों को पेयजल आपूर्ति हेतु आवश्यकता के अनुसार नलकूप खनन की अनुमति दी गई है। इसके अंतर्गत नगर निगम, नगर पालिका परिषद एवं नगर पंचायत अपने-अपने क्षेत्र में केवल पेयजल हेतु नलकूप खनन कर सकेंगे, जिसकी सूचना संबंधित प्राधिकृत अधिकारी को देना अनिवार्य होगा।

                           आदेश में यह भी उल्लेखित है कि नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नलकूप खनन के लिए अनुमति प्रदान हेतु अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को प्राधिकृत किया गया है। इसके तहत अनुविभागीय अधिकारी (रा.) रायगढ़ को रायगढ़ एवं पुसौर क्षेत्र, अनुविभागीय अधिकारी (रा.) खरसिया को खरसिया क्षेत्र, अनुविभागीय अधिकारी (रा.) घरघोड़ा को घरघोड़ा एवं तमनार क्षेत्र, अनुविभागीय अधिकारी (रा.) धरमजयगढ़ को धरमजयगढ़ क्षेत्र तथा अनुविभागीय अधिकारी (रा.) लैलूंगा को लैलूंगा क्षेत्र के लिए अधिकृत किया गया है।
उक्त प्राधिकृत अधिकारी अपने-अपने क्षेत्र में प्राप्त आवेदनों के अनुसार आवश्यकता का परीक्षण कर नलकूप खनन की अनुमति प्रदान करेंगे तथा अधिनियम के प्रावधानों का पालन सुनिश्चित करेंगे। यदि किसी व्यक्ति या एजेंसी द्वारा अधिनियम का उल्लंघन करते हुए नलकूप खनन किया जाता है, तो उनके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। यह आदेश तत्काल प्रभावशील हो गया है।

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