धरमजयगढ़ और लैलूंगा के जर्जर 4 छात्रावास भवनों की जगह अब बनेंगे हाईटेक हॉस्टल

by SUNIL NAMDEO
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डीएमएफ मद से मिली 6 करोड़ से अधिक राशि को हरी झंडी, हजारों बच्चों को मिलेगा सीधा लाभ, शिक्षा के साथ मिलेगा सुरक्षित और प्रेरक माहौल

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के दूरदर्शी एवं जनकल्याणकारी नेतृत्व में रायगढ़ जिले के आदिवासी अंचलों को एक बड़ी सौगात मिली है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से संचालित चार प्रमुख आदिवासी छात्रावासों के लिए नवीन भवन निर्माण को प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। यह निर्णय केवल भवन निर्माण तक सीमित नहीं, बल्कि आदिवासी समाज के शैक्षणिक, सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण की दिशा में एक दूरगामी पहल के रूप में देखा जा रहा है, जिससे आने वाले वर्षों में हजारों बच्चों का भविष्य संवरने वाला है।
              स्वीकृत कार्यों के अंतर्गत विकासखंड धरमजयगढ़ एवं लैलूंगा क्षेत्र में स्थित शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम सोनाजोरी, शासकीय आदिवासी कन्या आश्रम पुरूंगा, प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास मुकडेगा तथा प्री-मैट्रिक आदिवासी कन्या छात्रावास खड़गांव शामिल हैं। इन चारों छात्रावासों के लिए कुल लगभग 6.10 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसमें प्रत्येक भवन पर लगभग 1.52 करोड़ से 1.62 करोड़ रुपये व्यय किए जाएंगे। वर्षों से संचालित ये छात्रावास भवन अत्यंत जर्जर स्थिति में पहुंच चुके थे, जिससे बच्चों को कई प्रकार की असुविधाओं का सामना करना पड़ता था। अब नए, सुरक्षित और आधुनिक भवनों के निर्माण से न केवल इन संस्थानों का कायाकल्प होगा, बल्कि बच्चों को एक सम्मानजनक और प्रेरणादायक वातावरण भी प्राप्त होगा।
     इन छात्रावासों के निर्माण से प्रतिवर्ष लगभग 400 से 500 आदिवासी छात्र-छात्राएं सीधे लाभान्वित होंगे। आने वाले वर्षों में यह संख्या हजारों तक पहुंचने की संभावना है। दूरस्थ और वनांचल क्षेत्रों से आने वाले बच्चों के लिए यह सुविधा किसी वरदान से कम नहीं होगी, क्योंकि उन्हें अब बेहतर आवास, सुरक्षा और अध्ययन का अनुकूल वातावरण मिलेगा। नए भवनों में विद्यार्थियों को समग्र विकास के लिए आवश्यक सभी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें नियमित स्वास्थ्य परीक्षण, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु कोचिंग, निःशुल्क गणवेश एवं शैक्षणिक सामग्री, स्वच्छ पेयजल, आधुनिक शौचालय, पर्याप्त रोशनी एवं सुरक्षित आवासीय व्यवस्था शामिल हैं। इन व्यवस्थाओं से बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और वे पूरी एकाग्रता के साथ अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ सकेंगे। इन छात्रावासों में अध्ययन करने वाले बच्चे भविष्य में डॉक्टर, इंजीनियर, शिक्षक, प्रशासनिक अधिकारी और जागरूक नागरिक बनकर समाज और राष्ट्र के विकास में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह पहल आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने और शिक्षा के माध्यम से उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगी।

जनप्रतिनिधियों के समन्वित प्रयासों से मिली सौगात

इस महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय का श्रेय मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व को जाता है, जिनके मार्गदर्शन में आदिवासी क्षेत्रों के विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, जिले के प्रभारी मंत्री ने इस दिशा में विशेष रुचि लेते हुए निरंतर प्रयास किए। वहीं, वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक ओपी चौधरी के प्रभावी वित्तीय प्रबंधन और विकासोन्मुख सोच के कारण ही इस योजना के लिए आवश्यक बजट स्वीकृत हो सका। सांसद राधेश्याम राठिया ने भी डीएमएफ की बैठक में इन भवनों की आवश्यकता को प्रमुखता से रखते हुए विशेष पहल की। इन सभी जनप्रतिनिधियों के समन्वित और प्रतिबद्ध प्रयासों का ही परिणाम है कि आज रायगढ़ जिले के आदिवासी बच्चों को बेहतर शिक्षा, सुरक्षित आवास और उज्ज्वल भविष्य की दिशा में यह बड़ी सौगात मिल पाई है।

अभिभावकों ने जताया आभार

इस स्वीकृति के बाद रायगढ़ जिले के ग्रामीण एवं आदिवासी क्षेत्रों में खुशी का माहौल है। अभिभावकों और आम नागरिकों ने इसे बच्चों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने वाला ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। निश्चित रूप से यह पहल केवल भवन निर्माण नहीं, बल्कि रायगढ़ के आदिवासी बच्चों के सपनों को साकार करने की दिशा में एक मजबूत, स्थायी व प्रेरणादायक कदम है, जो आने वाले समय में पूरे क्षेत्र की तस्वीर बदल सकता है।

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