मुख्यमंत्री ने कहा – निराश्रित गौवंश को मिलेगा सुरक्षित आश्रय और समुचित देखभाल, प्रत्येक विकासखंड में बनेंगे गौधाम, आधारभूत सुविधाओं की होगी व्यवस्था

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम से राज्य में निराश्रित एवं घुमंतू गौवंश के संरक्षण और उनके समुचित व्यवस्थापन के उद्देश्य से “गौधाम योजना” का वर्चुअल शुभारंभ किया। इस अवसर पर जिला कलेक्टोरेट स्थित सभाकक्ष में जिला स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जहां मुख्यमंत्री के विशेष संबोधन का लाइव प्रसारण देखा गया। मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा प्रारंभ की जा रही गौधाम योजना का उद्देश्य प्रदेश में बेसहारा मवेशियों को सुरक्षित आश्रय उपलब्ध कराना, उनके संरक्षण को बढ़ावा देना तथा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि गोधन हमारी ग्रामीण संस्कृति, कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
जिला स्तरीय कार्यक्रम में जिला स्तरीय गौधाम समिति के अध्यक्ष बंशीधर बेहरा, जिला पंचायत सदस्य सुषमा खलखो, जनपद पंचायत अध्यक्ष सुजाता चौहान, उपाध्यक्ष रामश्याम डनसेना, सदस्य हेमंत डनसेना, दुर्गेश पटेल, विकासखंड रायगढ़ गौधाम अध्यक्ष हुकुम सिंह यादव, विकासखंड तमनार गौधाम अध्यक्ष भीमसेन बेहरा सहित गौधाम समिति के अन्य सदस्यगण, अशोक गुप्ता, रमेश कुंभकार, रोमेश दास, पूनम द्विवेदी, बंशीधर पटेल, जी.आर. चौहान, मुकेश पटनायक, स्थानीय जनप्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक, पशुधन विकास विभाग के उप संचालक एस.के. सिंह तथा विभागीय अधिकारी-कर्मचारी और पशुपालक किसान उपस्थित रहे।
गौधाम समिति के जिला अध्यक्ष बंशीधर बेहरा ने कहा कि बदलती जीवनशैली और शहरीकरण के कारण कई स्थानों पर गौवंश निराश्रित होकर सड़कों पर घूमते दिखाई देते हैं। ऐसे में गौवंश के संरक्षण, देखभाल, भोजन, उपचार और सुरक्षित आश्रय की व्यवस्था करना समाज और शासन दोनों की सामूहिक जिम्मेदारी है। गौधाम की स्थापना से निराश्रित गौवंश को सुरक्षित आश्रय मिलेगा, जहां उनके लिए चारा, पानी, चिकित्सा और देखभाल की समुचित व्यवस्था की जाएगी।
जिला पंचायत सदस्य सुषमा खलखो ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में गौवंश के संरक्षण और संवर्धन के लिए गंभीरता से कार्य कर रही है। गौधाम योजना निराश्रित और घुमंतू गौवंश के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सराहनीय पहल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पशुपालकों और किसानों को भी लाभान्वित कर रही है। जनपद पंचायत अध्यक्ष सुजाता चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति और परंपरा में प्राचीन काल से ही गौ माता को अत्यंत पूजनीय माना गया है। हमारे धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में गौ को माता का दर्जा दिया गया है और सदियों से समाज में गौ सेवा और गौ संरक्षण की परंपरा चली आ रही है।
पशुधन विकास विभाग के उप संचालक एसके सिंह ने बताया कि गौधाम योजना के तहत प्रत्येक विकासखंड में 10 गौधाम स्थापित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इन गौधामों में शेड, फेंसिंग, पेयजल, बिजली जैसी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। जिले से गौधाम की स्थापना के लिए 20 समितियों का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है, जिनमें से 12 समितियों का पंजीयन प्रक्रियाधीन है। पंजीयन पूर्ण होने के पश्चात शीघ्र ही गौधामों का संचालन प्रारंभ किया जाएगा।
गौधाम योजना के अंतर्गत गौवंश के पोषण आहार के लिए पहले वर्ष 10 रुपये प्रतिदिन प्रति पशु, दूसरे वर्ष 20 रुपये, तीसरे वर्ष 30 रुपये और चौथे वर्ष से 35 रुपये प्रतिदिन की सहायता दी जाएगी। अधोसंरचना निर्माण एवं मरम्मत के लिए प्रति वर्ष 5 लाख रुपये का प्रावधान रखा गया है। चरवाहों को 10,916 रुपये तथा गौसेवकों को 13,126 रुपये प्रतिमाह मानदेय प्रदान किया जाएगा। गौधामों में चारा विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रति एकड़ 47 हजार रुपये वार्षिक सहायता का प्रावधान है तथा अधिकतम 5 एकड़ भूमि तक 2.35 लाख रुपये प्रतिवर्ष सहायता दी जाएगी। प्रत्येक गौधाम में लगभग 200 गौवंश रखने की व्यवस्था निर्धारित की गई है। इस योजना के लागू होने से सड़कों और गांवों में घूमने वाले निराश्रित पशुओं की समस्या में कमी आएगी तथा गौवंश संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा।




