रायगढ़ (सृजन न्यूज)। राज्य शासन के निर्देशों के अनुपालन में रायगढ़ जिले में क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए लैंड बैंक स्थापित करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इसी तारतम्य में कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी ने आज रायगढ़ ब्लॉक के ग्राम बंगुरसिया एवं संबलपुरी का डीएफओ अरविंद पीएम के साथ स्थलीय निरीक्षण कर वैकल्पिक पौधरोपण के लिए उपयुक्त भूमि के चयन की कार्यवाही का जायजा लिया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों को शासन के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शीघ्र और सुव्यवस्थित ढंग से भूमि चिन्हांकन करने के निर्देश दिए। कलेक्टर ने सभी अफसरों को समन्वित प्रयास करते हुए समय सीमा में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिए, ताकि जिले में विकास कार्यों के साथ पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन के लक्ष्य को संतुलित रूप से प्राप्त किया जा सके।
उल्लेखनीय है कि नवा रायपुर अटल नगर से जारी पत्र के माध्यम से वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 के अंतर्गत वनभूमि व्यपवर्तन प्रकरणों में क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए प्रदेश स्तर पर लैंड बैंक स्थापित किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। भारत सरकार, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा समेकित दिशा-निर्देशों के आलोक में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा जिलों को नवीन दिशा-निर्देशों के अनुसार कार्यवाही करने कहा गया है।
कलेक्टर कॉन्फ्रेंस में यह तथ्य सामने लाया गया था कि प्रदेश में वन (संरक्षण एवं संवर्धन) अधिनियम, 1980 अंतर्गत लगभग 113 प्रकरण लंबित हैं। इनमें प्रथम चरण की स्वीकृति अपेक्षित है। इन प्रकरणों के लिए लगभग 31 हजार हेक्टेयर गैर वनभूमि अथवा राजस्व वनभूमि में क्षतिपूर्ति पौधरोपण की आवश्यकता है। समयबद्ध कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में राज्य शासन की विकास परियोजनाओं तथा निजी क्षेत्र के निवेश प्रभावित होने की आशंका है।
कलेक्टर श्री चतुर्वेदी ने निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप जिले में उपलब्ध राजस्व भूमि, राजस्व वनभूमि, छोटे-बड़े झाड़ के जंगल तथा घास-चट्टान मद की भूमि का वैज्ञानिक परीक्षण कर उपयुक्त भूखंडों को लैंड बैंक में शामिल किया जाए। उन्होंने निर्देशित किया कि चयनित भूमि का न्यूनतम रकबा, स्थल की स्थिति, पौधरोपण की संभावनाएं तथा मानचित्रण कार्य पूरी पारदर्शिता और तकनीकी मानकों के अनुसार किया जाए।
भारत सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार क्षतिपूर्ति पौधरोपण के लिए चयनित गैर वनभूमि का न्यूनतम क्षेत्रफल 25 हेक्टेयर होना आवश्यक है। विशेष परिस्थितियों, जैसे वन्यप्राणी संरक्षित क्षेत्रों के समीप, कम क्षेत्रफल भी स्वीकार्य हो सकता है। साथ ही मान्यता प्राप्त क्षतिपूर्ति वृक्षारोपण योजना के अंतर्गत ऐसे भूखंड भी चयन के लिए पात्र होंगे, जिनमें कम से कम पाँच वर्ष पूर्व पौधरोपण किया जा चुका हो। इसके लिए संबंधित भूमि का न्यूनतम क्षेत्रफल 10 हेक्टेयर तथा वन घनत्व 0.4 से अधिक होना अनिवार्य रहेगा। यह भूमि शासकीय अथवा निजी, दोनों श्रेणियों की हो सकती है, बशर्ते वह निर्धारित मानकों को पूर्ण करती हो।
पूर्व में राज्य शासन द्वारा गठित जिला स्तरीय तीन सदस्यीय लैंड बैंक समिति, जिसमें जिला कलेक्टर अध्यक्ष, कलेक्टर द्वारा नामांकित राजस्व विभाग के अधिकारी सदस्य तथा संबंधित वनमंडलाधिकारी सदस्य होते हैं, को नवीन दिशा-निर्देशों के अनुरूप पुनः सक्रिय कर अद्यतन डाटा संकलन एवं मानचित्रण कार्य करने के निर्देश दिए गए हैं। समिति द्वारा निर्धारित प्रपत्रों में समस्त विवरण संकलित करते हुए दो माह के भीतर चयनित भूमि की पूर्ण जानकारी शासन को तथा प्रधान मुख्य वन संरक्षक (भू-प्रबंध) एवं नोडल अधिकारी, वन संरक्षण अधिनियम, छत्तीसगढ़ को प्रेषित की जाएगी। निरीक्षण के दौरान सहायक कलेक्टर अक्षय डोसी, अपर कलेक्टर रवि राही, तहसीलदार सहित राजस्व एवं वन विभाग के अमला मौजूद थे।
बंगुरसिया और संबलपुरी में बिखरेगी हरियाली : कलेक्टर ने पौधरोपण स्थल का देखा सच
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