रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़ के युवाओं ने जनहित में खोला मोर्चा

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। विद्युत बिजली उत्पादन से छत्तीसगढ़ राज्य का मुनाफा बढ़ रहा पर रायगढ़ जिला अपनी पुरानी संपदाओं खुशहाली जीवन से बहुत दूर होते जा रहा। विकसित करके सुंदर रायगढ़ के झूठे दावों ने यह प्रमाणित किया कि चिराग तले अंधेरा और यह इस जिले में स्पष्ट रूप से सदृश्यत है कि जल-जंगल-जमीन का दोहन पूरे जिले में और प्रयास नाम भर के विकास का है।

रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे रायगढ़ के विनय शुक्ला, ऋषभ मिश्रा, सुरेंद्र पटेल, आदर्श श्रीवास, प्रीति केरकेट्टा, ईनाम सिद्दीकी, शेख रजॉल हसन, अभिषेक चौहान, सुनीता माइति, मुजीब अहमद, शिवम कछवाहा, नवीन शर्मा, राधा शर्मा, दिनेश टंडन, सौरभ साहू, योगेश चौहान, चिरंजीवी राय, अजय गायकवाड़, संजय देवांगन और अनिल अग्रवाल चीकू आदि ने संयुक्त हस्ताक्षर कर अध्यक्ष, राज्य विद्युत नियामक आयोग रायपुर के द्वारा रायगढ़ जिले के बिजली ऑफिस में दावा/आपत्ति में रायगढ़ जिले के नागरिकों और विद्युत उपभोक्ताओं का संयुक्त रूप से हस्ताक्षरित्र 7 बिंदुओं का पत्र सौंपा, साथ ही उक्त कार्यवाही में भाग लेकर रायगढ़ जिले वासियों की मांग को रखा कि रायगढ़ जिले वासियों को 600 यूनिट मुफ्त में विद्युत छत्तीसगढ़ शासन से आवश्यकता का जायज हक है। इसका कारण रायगढ़ जिले में विद्युत उत्पादन करने वाले उद्योग है जिनसे प्रदेश शासन के ऊर्जा विभाग की बिजली कंपनी को न्यूनतम दर पर बिजली मिलती है और प्रदेश सरकार इसके लिए रायगढ़ जिले का बहुमूल्य संपदा जल-जंगल-जमीन इनको उपलब्ध करा रही है।

इन बिंदुओं में मुख्य तौर पर प्राकृतिक जल देने के कारण जलस्तर 400 फीट के नीचे चला गया जिससे नागरिक प्रदूषित व केमिकल युक्त पानी पीने को मजबूर है। बिजली उत्पादन करने वाली फैक्ट्री के धुएं के प्रदूषण से छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के लिए बड़ी, बिजोरी, खजरा, इमली, आम, चिरौंजी, अचार और कपड़ों को खुले भयंकर प्रदूषण के कारण खुले आसमान के नीचे नहीं सूखा सकते। जंगलों को कोयला खदानों के सुपुर्द करा जा रहा है जो कोयला बिजली बनाने वाली कंपनी को सस्ते रेट में दिया जाता है। कोयला खदानों के कारण पेड़ और प्राकृतिक संपदा उजड़ने से गर्मी और तापमान बढ़, प्राकृतिक बहुमूल्य संपदा जिसमें जल, जंगल, जमीन समाप्त हो रहे। ऊर्जा उद्योगों के जहरीले धुएं और प्रदूषण से रायगढ़ जिले में जन्म लेने वाले बच्चों को अस्थमा की शिकायत उसके बाद आम इंसानों को खांसी, आंख की जलन, फेफड़ों की बीमारी, कैंसर आदि गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ रहा है।

रायगढ़ जिले में अस्वस्थ इंसानों के आंकड़े दिन पर दिन बढ़ते जा रहे हैं। इनके इलाजों की महंगी दवाइयां और हॉस्पिटल का खर्चा लाखों में होता है। बिजली उत्पादन करने वाले उद्योगों के प्रमुख आवश्यकता कोयला है और इसके परिवहन के लिए भारी वाहनों का उपयोग मामूली से बात हो गई। यहां इसके कारण औसतन प्रतिदिन 2 से ज्यादा इंसानों की मृत्यु इन भारी वाहनों से हो रही दुर्घटना में स्थानीय जनों की हो रही। प्रदेश के ऊर्जा विभाग का बिजली कंपनी को समय रहते इतनी भयंकर प्रदूषण, जहरीला पानी, फैलती गंभीर बीमारियों, सड़कों पर रेंगती मौतों आदि को रोकने के लिए योजना बनानी थी पर बिजली विभाग अपने बिजली के लाभांश और महंगे बिजली बिल दबाव पूर्वक पटवाने के नियम में आमदा है। इस विभाग की गुमशुदा सोच और इंसानों के जीवन की कल्पना अदृश्यित ही हमारे जिले में है।
छत्तीसगढ़ सरकार के ऊर्जा विभाग के अधीनस्थ लाभांश कमाने वाली आपकी विद्युत कंपनी को जिले ने अपना सब कुछ सौंप दिया पर उनकी व्यापारिक और लाभांश सोच ने रायगढ़ को कुछ नहीं दिया। यहां के नागरिकों और विद्युत उपभोक्ताओं की मांग है कि 600 यूनिट मुफ्त में बिजली रायगढ़ जिले के नागरिकों को विद्युत कंपनी दे। इसका मुख्य कारण 200 यूनिट रायगढ़ जिले में बिजली उत्पादन करने वाले उद्योगों के द्वारा भयंकर प्रदूषण पैदा करना, 200 यूनिट मुफ्त में बिजली उद्योगों के लिए कोयला खदानों के द्वारा मनमाने स्तर पर जल, जंगल, जमीन को तबाह करके प्राकृतिक संपदाओं को समाप्त करना और अस्वस्थ मानव जीवन की संख्या में निरंतर वृद्धि यद्यपि 200 यूनिट मुफ्त में बिजली सरकार दे रही है। कुल मिलाकर 600 मिनट मुफ्त में बिजली रायगढ़ जिले के निवासियों का मूल हक रायगढ़ जिला वासियों को त्वरित प्रदान करना ही न्याय होगा।