रायगढ़ और सुंदरगढ़ यूनियन की कई बैठक के बाद भी नहीं हो पा रहा निर्णय, धरना स्थल पर लगातार बढ़ रहा है तनाव, अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन को रहना होगा तैयार
रायगढ़ (सृजन न्यूज)। रायगढ़ जिला ट्रेलर मलिक कल्याण संघ द्वारा बीते 6 रोज से अपने हक की लड़ाई को लेकर आंदोलन इंदिरा विहार रोड संबलपुरी के पास पंडाल लगाकर जारी है।
रायगढ़ ट्रेलर यूनियन की शुरू से मांग रही है कि उनके साथ ओड़िशा की खदानों में भेदभाव तथा दादागिरी लंबे समय से दिखाई जा रही है। ड्राइवर या इस व्यवसाय से जुड़े स्टाफ के साथ कभी भी ओड़िशा में स्थित कोल खदान में मारपीट गाली-गलौज गाड़ियों को पर्ची न देना और लोडिंग में भेदभाव रखना यह ओड़िशा गाड़ी मालिकों और ट्रांसपोर्टों का व्यवहार रहा है।
जबकि ओड़िशा स्थित खदानों से लगभग 70 प्रतिशत माल रायगढ़ जिले की खदानों एवं अन्य आसपास के जिलों में खाली होता है। इसमें हमारे द्वारा किसी भी प्रकार की पाबंदी नहीं लगाई जाती परंतु उनके द्वारा वहां पर छत्तीसगढ़ की गाड़ियों के साथ शुरू से ही भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया जाता है। इसकी समय-समय पर जिला प्रशासन पुलिस प्रशासन और स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों को भी हमारे द्वारा सूचना दी जाती है। जब से यह धरना चालू हुआ है, तब से लगातार सुंदरगढ़ जिले से वहां के ट्रांसपोर्टर और गाड़ी मालिकों का रायगढ़ यूनियन के साथ वार्ता तो चल रही है, परंतु वह अपनी पुरानी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। जहां बराबरी की बात होती है, वहां वे केवल रायगढ़ की गाड़ियों को 15 से 20 फीसदी ही लोडिंग में हिस्सेदारी की बात करते हैं, इसलिए बैठक कोई नतीके के बिना रह जाती है।
यूनियन के सदस्यों में सतीश चौबे, यूनियन जिलाध्यक्ष आशीष यादव, रंजीत झा, सतनाम सिंघ वाधवा, बंटी सिंघानिया, अंकुर बंसल, प्रभाशंकर शाही, सरबजीत सिंघ, कमलेश सिंह, मंजुल दीक्षित ने बताया की जैसे-जैसे आंदोलन बढ़ता जा रहा है, वैसे-वैसे इस बात की भी पूरी आशंका है कि वह किसी भी समय उस रात को छत्तीसगढ़ की सीमा में दलबल के साथ घुसकर हमारे धरना स्थल पर आकर या अन्य किसी भी जगह पर यूनियन के सदस्यों के साथ कोई भी अनैतिक कार्य को अंजाम दे सकते हैं। इसके लिए प्रशासन को भी अपने आंख व कान को खुला रखना हुए किसी भी स्थिति से निपटने के लिए लगातार पेट्रोलिंग व्यवस्था को कड़ी करनी पड़ेगी और हमें सुरक्षा मुहैया करानी पड़ेगी ताकि किसी भी प्रकार का संघर्ष वाली स्थिति पैदा ना, क्योंकि हमारे द्वारा बहुत ही शांति तरीके से अपनी मांगों के लिए धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। हमारी एक ही मांग है कि अब जो भी कार्य होगा बराबरी का होगाम किसी भी प्रकार का परसेंटेज लोडिंग में नहीं स्वीकार किया जाएगा।
पिछले तीन दिनों से लगातार १०-१२ गाड़ियों में रात को ओड़िशा के लोग नशे की हालत में छत्तीसगढ़ घुसकर यहाँ अशांति फलाने का प्रयास कर रहे हैं, पर यूनियन के सदस्यों की सूझबूझ से अप्रिय स्थिति निर्मित होने नहीं दी गई है। वहीं, प्राप्त सूचना के आधार पर अभी 40 से 50 गाड़ी में सैकड़ों की संख्या में ओडिशा के लोग टपरिया बॉर्डर पर इकट्ठा हैं और आज रात किसी बड़ी अनहोनी की आशंका जताई जा रही है।




