पंचतत्व से वशीभूत देवी स्तुति और शिव पंचाक्षरी से चक्रधर समारोह हुआ गुंजायमान

by SUNIL NAMDEO
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दुर्ग के गुरु तरुण शर्मा और उनकी शिष्याओं ने कथक की अनुपम प्रस्तुति से बांधा समां

रायगढ़ (सृजन न्यूज़)। चक्रधर समारोह 2025 की नौवीं सांस्कृतिक संध्या गुरुवार को कथक नृत्य की अद्भुत प्रस्तुतियों के नाम रही। दुर्ग के सुप्रसिद्ध कथक नृत्याचार्य गुरु तरुण शर्मा और उनकी शिष्याएँ शारवी सिंह परिहार तथा रीति लाल ने भाव, मुद्रा, लय और भक्ति का ऐसा संगम प्रस्तुत किया, जिसने दर्शकों को गणेश, शिव और शक्ति की परम चेतना से जोड़ दिया।

कार्यक्रम की शुरुआत “सर्वमंगल मंगल्याय” गणेश वंदना से हुई, जिसे स्वयं गुरु तरुण शर्मा ने प्रस्तुत किया। इसके बाद शारवी सिंह परिहार ने देवी स्तुति और रीति लाल ने शिव पंचाक्षरी स्तोत्र की प्रस्तुति दी। अंत में पंचतत्व से वशीभूत देवी स्तुति की समूहिक प्रस्तुति ने संध्या को भक्ति, लय और सौंदर्य के अद्वितीय संगम से सराबोर कर दिया। बता दे कि गुरु तरुण शर्मा, जिन्हें नृत्यर्थी कलास्तंभ, नृत्य कालाचार्य, कला विद्वान तथा नृत्य युवा प्रतिभा जैसी उपाधियाँ प्राप्त हैं, पिछले 15 वर्षों से नृत्ययोदया कथक स्कूल के माध्यम से कला साधना और प्रशिक्षण में निरंतर योगदान दे रहे हैं।

            उन्होंने नेपाल, बेंगलुरु, उदयपुर, कटक, भिलाई और दुर्ग सहित देश के अनेक नगरों में अपनी नृत्य प्रस्तुतियों से व्यापक प्रशंसा अर्जित की है। शिष्या रीति लाल जिन्हें नृत्य कला रंजीता सम्मान और भारत शास्त्र नृत्य प्रवीणा जैसे विशिष्ट अलंकरण प्राप्त हैं, अपनी सशक्त अभिव्यक्ति और लयबद्धता के लिए जानी जाती हैं। वहीं शारवी सिंह परिहार को नृत्य नटरंग सम्मान, प्रणवम प्रतिभा अवार्ड, नृत्य मयूरी अवार्ड और मधु गुंजन अवार्ड सहित अनेक सम्मान प्राप्त हैं। उनकी साधना हर भाव और गति में स्पष्ट झलकती है। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का स्वागत कर अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त किया।

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