एनटीपीसी लारा की प्राथमिकता है पर्यावरण संरक्षण के साथ बिजली उत्पादन और राख उपयोगिता

by SUNIL NAMDEO
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रायगढ़ (सृजन न्यूज)। आज के सामाजिक परिवेश में बिजली एक आवश्यक सेवा है। इस बिजली सेवा को प्रदान करने के लिए एनटीपीसी लारा पूर्णरूप से समर्पित है। एनटीपीसी लारा एक कोयला आधारित बिजली सयन्त्र है। इस सयन्त्र से उत्पादित बिजली का 50 प्रतिशत छत्तीसगढ़ की ऊर्जा जरूरत को पूरा करता है। और शेष बिजली मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, गोवा, दमन-दीव, दादरा तथा नगर हवेली आदि को प्रेषण किया जाता है।

                   कोयला आधारित बिजली सयन्त्र होने के नाते बिजली उत्पादन के साथ बड़ी मात्रा में राख उत्सर्जन भी होता है। इस राख को पर्यावरण अनुकूल तरीके से उपयोग करना एनटीपीसी लारा का प्रमुख कार्य है। प्रचलित नियम के अनुसार बिजली बनाने के लिए राख का शत प्रतिशत उपयोग करना अनिवार्य है। यहाँ यह बताना उचित होगा की एनटीपीसी लारा परियोजना में पर्यावरण अनुकूल सुपर क्रिटिकल तकनीक पद्धति से बिजली उत्पादन किया जाता है। जो पुराने प्लांटों के मुक़ाबले ज्यादा कार्यदक्षता सम्पन्न है।

एनटीपीसी लारा बिजली सयन्त्र से निकलने वाले राख का उपयोग छत्तीसगढ़ में बनरहे राष्ट्रीय राजमार्ग एवं निचले भूमि की भराव के लिए किया जाता है। राख़ ढुलाई कार्य को सुचारु रूप से सम्पादन करने के लिए एनटीपीसी लारा द्वारा अनेक परिवहन कंपनी को संविदा के आधार पर कार्य आबंटित हुआ है। परिवहन ठेकेदार को संविदा के शर्तों पर शासन द्वारा निर्धारित नियम का पालन करते हुए राख परिवहन करना है। एनटीपीसी उनसभी कार्यों को पर्यावरण अनुकूल उपाय से संपादन करने के लिए प्रतिबद्ध है। राख़ परिवहन कार्य में ठेकेदार के किसी भी प्रकार के लापरवाही के लिए वह स्वयं ही जिम्मेदार है। साथ ही संविदा शर्तों के आधार पर एनटीपीसी ऐसी लापरवाही कर् रहे परिवहन संस्थानों के ऊपर कठिन कार्यवाही करता है।

एनटीपीसी लारा भारत सरकार की उद्यम एनटीपीसी लिमिटेड की एक इकाई है जोकी केंद्र एवं राज्य सरकार की सभी नियमों का पालन करते हुए बिजली उत्पादन करता है। पर्यावरण सुरक्षा की दिशा में एनटीपीसी में फ्लू गॅस सलफुराइजेसन (एफ़जीडी) सिस्टम लगाया गया है, जिस से वातावरण साफ रहें। साथ ही विभिन्न पर्यावरण अनुकूल उपाय अपनाने के साथ पर्यावरण सरंक्षण के साथ संवर्धन की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

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