रायगढ़ (सृजन न्यूज)। कुर्बानी का त्यौहार बकरीद इस साल रायगढ़ के फारूकी फैमिली के लिए बेहद खास है। दरअसल, अल्लाह ताला को कुर्बानी देने के लिए फारूकी परिवार ने एक नहीं, बल्कि दो ऐसे देसी बकरों को लिया है, जिसका वजन ही 90-90 किलो है। यही वजह है कि फारूकी परिवार के खालिस और तंदुरुस्त बकरे सुर्खियों में है।
शहर के चांदनी चौक की फारूकी गली में रहती है फारूकी फैमिली। चूंकि, फारूकी परिवार उन्नत किस्म के बकरे और खस्सी पालने का शौक रखते हैं, इसलिए अबकी बार उन्होंने मधुवन पारा के पुरी बगीचा निवासी ईमाम भाई से देसी किस्म यानी छत्तीसगढ़िया प्रजाति के दो बकरों को लिया है। दिलचस्प बात यह है कि एक बकरे का वजह ही कम से कम 90 किलो का है। दोनों बकरों की उम्र 2-2 साल की है।
माना जाता है कि बकरीद में अल्लाह को वही कुर्बानी कबूल होती है, जो सबसे प्यारा होता है। ऐसे में फारूकी परिवार जिन दो बकरों की बकरीद पर कुर्बानी देगा, उसका ख्याल पूरी फैमिली रखती है। फारूकी परिवार के सदस्य बताते हैं कि ईद उल अजहा पर जिस खस्सी या बकरे को कुर्बान किया जाता है, वह न केवल तंदुरुस्त होना चाहिए, बल्कि खूबसूरत भी होना चाहिए। लंगड़ा, काना, या सिंग तक टूटा नहीं होना चाहिए। और तो और कुर्बानी देने वाले इस जानवर की उम्र 1 साल से ऊपर होना चाहिए।
फारूकी परिवार चूंकि बकरीद के लिए ऐसे बकरे की तलाश में था जो औरों से जुदा और बेहद आकर्षक हो, इसलिए ईमाम भाई से मुलाकात के बाद उनकी चाहत पूरी हुई। 90-90 किलो के दोनों बकरों को घर लाने के बाद फारूकी परिवार उनकी साफ-सफाई और खानपान के साथ उनके सुख-सुविधा के इंतजामात में काफी बिजी भी हैं। यही वजह है कि देसी किस्म की ऊंची ठाठ-बाठ वाले इन बकरों की एक झलक पाने के लिए लोग उतावले भी दिखे।