
रायगढ़ (सृजन न्यूज)। शहर में प्रदूषण की स्थिति गंभीर होती जा रही है, जिससे स्थानीय निवासियों की सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। हालांकि रायगढ़ के प्रदूषण स्तर पर हालिया आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन छत्तीसगढ़ राज्य की राजधानी रायपुर में प्रदूषण के खतरनाक स्तर तक पहुंचने की घटनाएं सामने आई हैं। उदाहरण के लिए, नवंबर 2024 में रायगढ़ के कुछ इलाकों में पीएम 2.5 का स्तर 317 तक दर्ज किया गया था, जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक माना जाता है।
रायगढ़ में भी औद्योगिकीकरण और बढ़ती आबादी के कारण प्रदूषण की समस्या बढ़ रही है। गेरवानी, पूंजीपथरा जैसे औद्योगिक क्षेत्रों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं और अन्य प्रदूषक तत्व हवा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रहे हैं। स्थानीय निवासी बताते हैं कि इन क्षेत्रों में हवा में धुंआ और कालिख की अधिकता के कारण सांस की बीमारियां आम हो गई है।
वायु प्रदूषण से बच्चों में अस्थमा, फेफड़ों के कैंसर और ब्रोंकाइटिस जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्रदूषण के संपर्क में रहने से बच्चों के फेफड़ों की कोशिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जिससे दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं ।
इस स्थिति से निपटने के लिए स्थानीय प्रशासन और नागरिकों को मिलकर प्रयास करने की आवश्यकता है। औद्योगिक प्रदूषण को नियंत्रित करने, हरित क्षेत्र बढ़ाने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने से प्रदूषण के स्तर को कम किया जा सकता है।