रायगढ़ (सृजन न्यूज़)। चक्रधर समारोह के अंतिम दिन छत्तीसगढ़ की पारंपरिक गेड़ी नृत्य प्रस्तुति ने खूब वाहवाही बटोरी। बिलासपुर से आए लोक श्रृंगार भारती गेड़ी नृत्य दल ने संचालक अनिल कुमार गढ़ेवाल के नेतृत्व में शानदार प्रस्तुति से सबका मन मोह लिया। दर्शकों ने लंबे अरसे बाद सामूहिक गेड़ी नृत्य देखा और इसका भरपूर आनंद उठाया।
उल्लेखनीय है कि गेड़ी लोक नृत्य छत्तीसगढ़ राज्य की पुरातन लोक संस्कृति में से एक है, जिसे हरेली पर्व के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। छत्तीसगढ़ राज्य के विद्वानों एवं बुजुर्गो की ऐसी मान्यता रही है कि गेड़ी नृत्य लगभग 2000 वर्ष से भी अधिक पुराना लोक नृत्य है। इस नृत्य परंपरा को लोक श्रृंगार भारती के लोक कलाकारों ने फिर से जीवित किये हैं और इसका सरंक्षण कर रहे हैं। गेड़ी लोक नृत्य दल को ओड़िशा राज्य के कटक जिला में आयोजित राष्ट्रीय संगीत एवं नृत्य प्रतियोगिता में 215 दलो की भागीदारी में प्रथम स्थान प्राप्त हो चुका है।
ठीक वैसे ही उत्तरप्रदेश के बरेली शहर में आयोजित उत्सव में 200 दलों की भागीदारी में प्रथम स्थान तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में आयोजित राष्ट्रीय गीत एवं नृत्य, नाट्य प्रतियोगिता में 195 दलों की भागीदारी में गेड़ी नृत्य को प्रथम स्थान प्राप्त हो चुका है। अभी तक उनकी टीम द्वारा गेड़ी लोक नृत्य का प्रदर्शन भारत वर्ष के 13 राज्यों में किया जा चुका है। गेड़ी नृत्य दल की सबसे खास बात यह है कि आज के आधुनिक युग में भी इस नृत्य दल में आपको आधुनिकता का एक अंश भी नजर नहीं आया।
इस कला को प्रदर्शित करने वाले लोक कलाकारों में दल प्रमुख तथा मुख्य गायक अनिल कुमार गढेवाल, संजय रात्रे, मोहन डोंगरे, रामगोपाल कलियारी, भरत वस्त्रकार, फागुराम सूर्यवंशी गेंड़ी नृत्य करेंगे प्रभात बंजारे, मनोज माण्डले, घनश्याम ओगरे, लक्ष्मी नारायण माण्डले, थानेश्वर खाण्डे, विनोद रात्रे, सजीत बंजारे तथा फुलचंद ओगरे, साथ में गेड़ी नृत्य में भागीदारी निभाये।




