छग के भांजे राम के दर्शन के लिए रायगढ़ के 102 श्रद्धालु अयोध्या धाम के लिए रवाना

by SUNIL NAMDEO
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रायगढ़ (सृजन न्यूज)। रामलला दर्शन योजना से जिले के श्रद्धालुओं के सपने साकार हो रहे हैं। श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम में भगवान रामलला का दर्शन करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। इस योजना के तहत रायगढ़ जिले से 102 श्रद्धालुओं का 12 वां जत्था बिलासपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना हुआ। इसमें ग्रामीण क्षेत्र से 78 एवं नगरीय क्षेत्र से 24 श्रद्धालु शामिल हैं।

                 श्रद्धालु को रायगढ़ जिला मुख्यालय से बस के माध्यम से बिलासपुर रेलवे स्टेशन के लिए रवाना किया गया। श्रद्धालु विशेष ट्रेन से अयोध्या धाम की ओर प्रस्थान करेंगे। श्रद्धालुओं को अयोध्या में श्री रामलला के दर्शन के साथ वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के दर्शन और गंगा आरती का सौभाग्य प्राप्त होगा। श्री रामलला दर्शन योजना का लाभ उठाने वाले श्रद्धालुओं के लिए भोजन, आवास व आवागमन की समुचित व्यवस्था शासन द्वारा सुनिश्चित की गई है।
      रायगढ़ से रवाना होने के दौरान श्रद्धालुओं में तीर्थ यात्रा को लेकर विशेष उत्साह एवं आस्था का वातावरण देखने को मिला। श्रद्धालुओं ने कहा कि इस योजना से उनकी वर्षों से संजोया श्री रामलला दर्शन का सपना अब साकार होने जा रहा है। श्रद्धालुओं ने भावुकता के साथ कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की इस पहल ने हमें जीवन का अमूल्य अवसर दिया है, जिसके लिए हम उनके आभारी हैं। बचपन से रामायण में रामजन्मभूमि की कहानी सुनते आए थे, लेकिन अब पहली बार उस धरती पर जाने का सौभाग्य मिल रहा है।

क्या है श्री रामलला दर्शन योजना
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के मंशानुरुप छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा शुरू की गई श्री रामलला दर्शन योजना एक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य राज्य के नागरिकों को अयोध्या में राम मंदिर के निःशुल्क दर्शन का अवसर प्रदान करना है। इस योजना के तहत, यात्रा, भोजन, आवास, और स्थानीय परिवहन सहित सभी खर्च छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा वहन किए जाते हैं। लाभार्थियों का चयन जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति द्वारा किया जाता है। आवेदन प्रक्रिया और विस्तृत दिशा-निर्देश संबंधित जिले के तहसील या उप-तहसील कार्यालयों में उपलब्ध होते हैं। इस यात्रा पैकेज में वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर कॉरिडोर के दर्शन और गंगा आरती भी शामिल होती है। यह योजना धार्मिक आस्था के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने का प्रतीक है।

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