
रायगढ़ (सृजन न्यूज)। माँ अष्टमहालक्ष्मी मंदिर वैष्णवी धाम,पंडरीपानी (पूर्व) रायगढ़ में द्वितीय वार्षिकोत्सव के अवसर पर त्रिदिवसीय विश्व शांति श्री सिद्धि महायज्ञ जनकल्याण, धन, ऐश्वर्य, सुख, समृद्धि की प्राप्ति हेतु भव्य महायज्ञ का आयोजन अगहन माह के अंतिम गुरुवार 3,4 एवं 5 दिसंबर को किया जा रहा है। मां महालक्ष्मी सेवक पंडित रविभूषण शास्त्री श्रद्धालु जनों को वार्षिकोत्सव एवं महायज्ञ में पुण्य के भागी बनने के लिये अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।

गजमार पहाड़ के पीछे विराजी हैं माता

गजमार पहाड़ी के पीछे ग्राम पंडरीपानी में हरियाली से आच्छादित महालक्ष्मी मंदिर में माँ लक्ष्मी विराजी हैं। मंदिर में प्रवेश करते ही अलग अनुभूति होती है। माता के जैसे ही दर्शन होते हैं तो श्रद्धालुओं के दोनों हाथ स्वमेव माता की ओर आश्रित एवं भावपूर्ण आगे हो जाते हैं। लगता है कष्ट माँ लक्ष्मी हर लेंगी। पंडरीपानी स्थित महालक्ष्मी मंदिर की नींव के 2017 में रख निर्माण कार्य आरंभ किया गया जो 2023 में पूर्ण हुआ और माता कृपा से प्राणप्रतिष्ठा 6 दिसंबर से 10 दिसंबर के शुभ मुहूर्त में किया गया। शास्त्री जी ने बताया कि मंदिर में 10 महाविद्या-तारा, काली, छिन्नमस्ता, षोडसी ,भुवनेश्वरी ,त्रिपुर भैरवी ,धूमावती, बगुलामुखी, माँ मातंगी, माँ कमला हैं, वही माँ कमला, माँ विमला, माँ मंगला और भैरव बाबा भी विराजे हैं।
वैष्णवी देवी धाम से 3 पिंडी महालक्ष्मी, महाकाली, महासरस्वती लाकर स्थापित किया गया है, वहीं 12 गजदेवता है। सीढ़ी के द्वार में बैठे हैं माता के द्वारपाल – जय विजय हैं तो द्वार में गजलक्ष्मी बैठी हैं। मंदिर में 11 छोटा गुम्बज और बड़ा नीलचक्र स्थापित है। मंदिर प्रांगण में प्राचीन प्राकृतिक कुआं है, जिसे सप्ततीर्थ कूप कहते हैं, जिसमें जजमान को स्नान कराने से ग्रह दोष की शांति होती है। मंदिर के नीचे भवन का नाम शास्त्री जी ने अपनी दिवंगत माता बश्रीमती प्रियंवदा मिश्रा के नाम प्रियंबदा भवन रखा है।

अगहन गुरुवार को होती है विशेष पूजा
आचार्य पंडित रविभूषण शास्त्री ने बताया कि द्वितीय वार्षिक उत्सव के अवसर पर अगहन माह के अंतिम गुरुवार यानी 4 दिसंबर को प्रातः 9 बजे से 1008 श्री सूक्त पाठ से मां महालक्ष्मी की विशेष कृपा प्राप्ति हेतु 24 घंटे का अखंड हवनात्मक पाठ के साथ हवन किया जाएगा। जो भक्तगण इस श्री सूक्त पाठ के हवन में किसी भी समय बैठना चाहते हैं, वे अपना नाम पंडित जी के पास लिखवा सकते हैं। इसी तरह 3 दिसंबर को कलश स्थापना एवं वेदी पूजन प्रातः 9 से अपरान्ह 1 बजे तक और दोपहर 3 से शाम 6 बजे तथा 4 दिसंबर (गुरुवार) को प्रातः 9 से 5 दिसंबर की सुबह 10 बजे तक अखंड श्री सूक्त मंत्रों के 1008 भावनात्मक पाठ के साथ 5 दिसंबर को पूर्वान्ह 10:30 बजे पूर्णाहुति एवं महाआरती साथ ही पुष्पांजलि तो अपरान्ह 12 बजे से महालक्ष्मी का महाप्रसाद भंडारा किया जाएगा।