Home छत्तीसगढ़ डायलिसिस नहीं होने से ऋषिकेश की मौत, भड़के लोग

डायलिसिस नहीं होने से ऋषिकेश की मौत, भड़के लोग

by SUNIL NAMDEO EDITOR


जशपुरनगर। सोमवार सिविल अस्पताल में बिजली की आंख मिचौली और अस्पताल में इमरजेंसी बिजली की अनुउपलब्धता से 40 वर्षीय युवा की डायलिसिस नही होने के कारण हुई असमय मौत परिजनों ने बिजली विभाग और सिविल अस्पताल के ऊपर गम्भीर लापरवाही का आरोप लगाया।

                             सोमवार सुबह बिजली की हर दस मिनट में गुल होने और अस्पताल में बिजली की अतिरिक्त उपलब्धता नहीं होने के कारण 40 वर्षीय युवा ऋषिकेश बारीक की असमय मौत हो गई। डॉक्टर शेखर ने बताया कि मुझे पेशेंट को देखने बुलाया गया था पर मेरे आने से पहले धड़कन और सांस रुक चुकी थी, जिसके बाद सीपीआर देकर बचाने की कोशिश की गई पर उन्हें नहीं बचाया जा सका। डायलिसिस टेक्नीशियन मनोज कुमार ने बताया कि सुबह पेशेंट को 9 बजे अस्पताल डायलिसिस के लिए लाया गया था पर बिजली के लगातार गोल होने के कारण डायलिसिस नहीं कर पाए। हर 10 से 15 मिनट में बिजली गुल हो रही था जिसके कारण डायलिसिस नहीं हो सका। डायलिसिस में कार्य करने वाले कर्मचारी के द्वारा बताया गया कि जनरेटर पहले से ही खराब थी। यह बात ऋषिकेश के घरवालों को बता दी गई थी। डॉ. मिंज ने बताया कि अस्पताल का जनरेटर चालू करने की कोशिश की गई पर नहीं हो पाया।


                                  महाकुल समाज के पदाधिकारी रवि यादव ने बताया कि सिविल अस्पताल पत्थलगांव में डायलिसिस समय पर नहीं होने से एक 40 वर्षीय युवा की असमय मौत हो गई। पत्थलगांव के बिजली कंपनी द्वारा 22 अप्रैल को सुबह से लगातार बिजली गुल रहने एवं पत्थलगांव सिविल अस्पताल में बिजली की कोई इमरजेंसी उपलब्धता नहीं है। जो गम्भीर लापरवाही का मामला है। वरिष्ठ अधिवक्ता मोहन यादव ने बताया कि बिजली कंपनी के द्वारा लगातार बिजली गुल होने एवं सिविल अस्पताल में लाइट की कोई अतिरिक्त व्यवस्था नहीं होने से एक युवा की मौत हो गई, जबकि जशपुर जिले से मुख्यमंत्री हैं। फिर भी सरकारी विभागों के द्वारा इस तरह की लापरवाही होना समझ से परे है। बिजली कंपनी और सिविल अस्पताल में जिम्मेदारी नाम की कोई बात नही दिख रहा है।

प्रबंधन की लापरवाही पर भड़कीं गोमती
पत्थलगांव विधायक गोमती साय ने अस्पताल पहुंचकर वस्तुस्थिति की जानकारी लेते हुए अस्पताल प्रबंधन के पर नाराज भी हुईं। डायलिसिस में बिजली की इमरजेंसी उपलब्धता नहीं होने से ऋषिकेश की मौत पर कलेक्टर रवि मित्तल से फोन कर अस्पताल की व्यवस्था को जल्द सुधारने की ताकीद करते हुए उन्होंने कहा कि अस्पताल की हालत देख कर मुझे अस्पताल में घुसने का मन नहीं करता। अस्पताल में लोगों को सभी सुविधा समय से मिले, साथ ही डायलिसिस में हुई ऋषिकेश बारीक की मौत की विभागीय जांच कर दोषियों के ऊपर कड़ी कार्यवाही करने कहा।


क्या कहती हैं एसडीएम
एसडीएम आकांक्षा कहती हैं कि अस्पताल में इमरजेंसी बिजली की व्यवस्था होनी ही चाहिए। बिजली कंपनी द्वारा लगातार बिजली गुल होने एवं अस्पताल में जनरेटर खराब होने की जांच की जाएगी। जिसकी भी लापरवाही सामने आती है, हम उच्च अधिकारियों को इसकी जानकारी देकर कार्रवाई करने कहेंगे।

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