Home रायगढ़ न्यूज सशिमं में कारगिल विजय दिवस और आचार्य व्यक्तित्व विकास आवर्ती प्रशिक्षण वर्ग संपन्न

सशिमं में कारगिल विजय दिवस और आचार्य व्यक्तित्व विकास आवर्ती प्रशिक्षण वर्ग संपन्न

by SUNIL NAMDEO

रायगढ़ (सृजन न्यूज)। शहर के राजीव नगर स्थित सरस्वती शिशु मंदिर उच्च माध्यमिक विद्यालय में 26 जुलाई को भैया-बहनों के द्वारा शिशु भारती के अंतर्गत विजय कारगिल विजय दिवस समारोह के अलावे आचार्य व्यक्तिगत विकास को दृष्टिगत रखते हुए द्वितीय आवर्ती प्रशिक्षण वर्ग का आयोजित हुआ।
वर्ग का शुभारंभ विद्या की अधिष्ठात्री सरस्वती मां, ओम और भारत माता के समक्ष संस्था के प्राचार्य जगदेव प्रसाद पटेल और आचार्य श्याम लाल पटेल के द्वारा दीप प्रज्जवलित करने के सरस्वती वंदना किया गया। तत्पश्चात् विद्यालय के शारीरिक शिक्षण प्रमुख आचार्य श्याम लाल पटेल के द्वारा आचार्य दैनंदिनी (शिक्षक डायरी) कैसे भरें, विषय पर आचार्यों को विस्तार से बताया गया। उन्होंने कहा कि भैया – बहनों को सीखने से पहले अपने विषय का पूर्व तैयारी करके आना आवश्यक है। उन्होंने सुंदर ढंग से विषय वस्तुओं का प्रतिपादन करते हुए बताया कि शिक्षक की तैयारी के आधार पर यह सुनिश्चित होता है कि उनके द्वारा जिस शिक्षण पद्धति का प्रयोग किया जाता है, उसके माध्यम से भैया – बहन उस विषय वस्तु को उतनी सुगमता और सुलभता से ग्रहण कर सकते हैं। तीजा पटवा आचार्या ने अभिभावक सम्पर्क क्यों और कैसे, विषय पर वृहद और विस्तार से बताया।
संस्था प्रमुख जगदेव प्रसाद पटेल ने शारीरिक शिक्षा के अंतर्गत शारीरिक क्षमता विकास को लेकर प्रारंभिक समता में दक्ष, आरम, विश्रम, वाम- दक्षिण वृत, वाम, दक्षिण, पूर प्रति सर, एक तति, द्वि तति, त्रि तति का अभ्यास कराने के बाद आचार्यों के द्वारा भरा जाने वाला अभिलेखों में शिशु उपस्थिति पंजी, आचार्य दैनंदिनी, परीक्षाफल पंजी आदि पंजियों को भरने के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए सावधानी बरतने की ओर जोर दी। वहीं, विद्यालय सामाजिक चेतना का केंद्र बने, इस विषय पर रजनी थवाईत आचार्या ने सुन्दर प्रस्तुति दी। गीत प्रमुख आचार्या कविता तिवारी ने भारत मां के चरण कमल की गीत का अभ्यास कराया। वंदना – प्रार्थना प्रमुख आचार्या रेवती मालाकार के द्वारा सरस्वती वंदना “या कुन्देन्दुतुसार हार धवला” का अभ्यास कराया गया। इसी कड़ी में उजाला साहू आचार्या और मोना यादव आचार्या के द्वारा से सरस्वती वंदना का अभ्यास कराया गया, जिसमें उन्होंने भैया – बहनों द्वारा वंदना सत्र में होने वाली छोटी-छोटी गलतियों से आचार्य बंधु – भगिनियों को अवगत कराया। अभ्यास के आगामी क्रम में व्यायाम योग का अभ्यास सुषमा होता आचार्या द्वारा आचार्य बन्धु भगिनियों को कराया गया एवं भैया – बहनों के जीवन में उसके उपयोगिता के संबंध में भी उनके द्वारा जानकारी दी गई।
शिक्षक का मुख्य दायित्व भैया – बहनों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर निकाल कर उनमें निखार लाना है, यह आवश्यक नहीं है कि सभी भैया – बहिन पढ़ाये जाने वाले विषयों में पारंगत हो जाए किंतु उन्हें जो भी आता है वह सर्वश्रेष्ठ और सर्वोत्कृष्ट हो । इसके लिए शिक्षक की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। आचार्य आवर्ती प्रशिक्षण वर्ग आयोजित करने का उद्देश्य है कि आचार्य बन्धु – भगिनीयों की दक्षता, क्षमता और कुशलता में वृद्धि हो। जो भैया बहनों के सर्वांगीण विकास में सहायक बने।

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